Kishanganj Dumping Yard Case: किशनगंज. मोतीबाग स्थित डंपिंग यार्ड से फैल रहे प्रदूषण और उससे लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है. राष्ट्रीय आरटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता मोहम्मद अंसार खान की शिकायत पर आयोग ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कर चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.
मानवाधिकार उल्लंघन का प्रथम दृष्टया मामला माना
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के माननीय सदस्य प्रियंक कानूनगो की पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा-12 के तहत मामले का संज्ञान लिया. आयोग ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया मानवाधिकारों के उल्लंघन के प्रतीत होते हैं. इसलिए मामले की विस्तृत जांच आवश्यक है.
डंपिंग यार्ड में कचरा जलाने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि किशनगंज नगर परिषद द्वारा मोतीबाग स्थित घनी आबादी वाले क्षेत्र में लंबे समय से ठोस कचरे का अवैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है. डंपिंग यार्ड में बार-बार कचरा जलाने से जहरीला धुआं, दुर्गंध और गंभीर वायु प्रदूषण फैल रहा है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.
स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर असर का दावा
शिकायतकर्ता ने कहा है कि प्रदूषण के कारण बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों सहित स्थानीय लोगों में श्वास संबंधी बीमारियां, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं. शिकायत में इसे संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त जीवन के अधिकार तथा स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है.
पहले भी की गई थी शिकायत
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन, नगर परिषद और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन कोई प्रभावी और स्थायी कार्रवाई नहीं की गई. इसके बाद मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष उठाया गया.
चार सप्ताह में मांगी गई रिपोर्ट
आयोग ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की जांच कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई प्रतिवेदन आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाए. रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग आगे की कार्रवाई पर निर्णय करेगा.
स्थानीय लोगों की बढ़ी उम्मीद
Kishanganj Dumping Yard Case: मोतीबाग डंपिंग यार्ड से उठने वाले धुएं और प्रदूषण को लेकर स्थानीय लोग लंबे समय से विरोध जता रहे हैं. अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद लोगों को उम्मीद है कि इस गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभाग ठोस कदम उठायेंगे.
