Nagar Panchayat BUIDCO: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज नगर क्षेत्र में विकास योजनाओं की आड़ में बड़े वित्तीय घालमेल की आशंका को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है. मामला नगर पंचायत ठाकुरगंज के विभिन्न वार्डों में बनने वाले आरसीसी (RCC) नाला निर्माण से जुड़ा है. आरोप है कि जिस मुख्य कॉरिडोर पर राज्य सरकार की बड़ी एजेंसी ‘बुडको’ (BUIDCO) पहले से ही करोड़ों की लागत से नाला बनाने की टेंडर प्रक्रिया चला रही है, ठीक उसी रास्ते के अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर नगर पंचायत प्रशासन ने भी अपने स्तर से करोड़ों के नए टेंडर जारी कर दिए हैं. इस ‘दोहरी निविदा’ (Double Tender) के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोप लग रहे हैं, जिसकी शिकायत अब किशनगंज डीएम के पास पहुंची है.
बुडको बनाम नगर पंचायत: करोड़ों की दो योजनाओं का गणित
- बुडको की मूल परियोजना (2025): बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने वर्ष 2025 में ही ₹4,31,61,800 (चार करोड़ इकतीस लाख इकसठ हजार आठ सौ रुपये) की लागत से एक मेगा प्रोजेक्ट की स्वीकृति दी थी. इसके तहत ठाकुरगंज के वार्ड संख्या-01, 02, 05 एवं 06 के अंतर्गत जुबली चौक से लेकर जलेबिया मोड़ तक सड़क के दोनों किनारों पर आरसीसी नाला का निर्माण किया जाना है, जो अभी टेंडर प्रक्रिया के अंतिम चरण में है.
- नगर पंचायत के नए टेंडर (2026): इस वृहद योजना के लंबित रहने के बीच, वर्ष 2026 में नगर पंचायत ठाकुरगंज ने अचानक उसी रूट से जुड़े विभिन्न हिस्सों जैसे—रेलवे रोड से भातढाला तक, राम जानकी मंदिर से ब्लॉक तक और सिकंदर पटेल के घर से जलेबिया मोड़ तक आरसीसी नाला निर्माण के लिए अलग-अलग टुकड़ों में टेंडर निकाल दिए. इन विभाजित योजनाओं का बजट भी करोड़ों रुपये आंका गया है.
कागजों पर बनी सड़क का पुराना ‘खेल’ याद कर सहमे लोग
वार्ड नंबर 09 का पुराना घोटाला: ठाकुरगंज नगर क्षेत्र में इस नए नाला विवाद को लेकर आम जनता में आक्रोश इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि नगर पंचायत का पुराना रिकॉर्ड विकास योजनाओं की कथित विसंगतियों से भरा रहा है. स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने याद दिलाया कि इससे पूर्व वार्ड संख्या-09 में एक ऐसी बहुचर्चित सड़क का मामला सामने आया था, जिसके संदर्भ में आरोप लगे थे कि फाइलों और कागजों पर सड़क का निर्माण भी हो गया और संवेदक (ठेकेदार) को करोड़ों का भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन धरातल पर वह सड़क कभी अस्तित्व में ही नहीं आई. उस घोटाले की गूंज के बाद अब नाला निर्माण में दिख रही इस जल्दबाजी ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर दोबारा सवाल खड़े कर दिए हैं.
अलाइनमेंट और बीओक्यू की होगी संयुक्त जांच; कार्यपालक पदाधिकारी ने दी सफाई
शिकायतकर्ता द्वारा जिला प्रशासन को सौंपे गए आवेदन में दोनों विभागों द्वारा जारी की गई योजनाओं की विस्तृत कार्य प्रतिवेदन (DPR), बिल ऑफ क्वांटिटीज (BOQ), चेनेज (माप सीमा) और अलाइनमेंट का गहन मिलान कराने की मांग की गई है. तकनीकी विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम से स्थल निरीक्षण कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने तक नगर पंचायत के टेंडर पर विशेष निगरानी रखने का अनुरोध किया गया है.
प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी का पक्ष:
करोड़ों रुपये की इन दोनों नाला योजनाओं के बीच संभावित ओवरलैपिंग और दोहरे भुगतान (Double Payment) की आशंका को लेकर जब ठाकुरगंज नगर पंचायत के प्रभारी कार्यपालक पदाधिकारी मो. इरफान आलम से बात की गई, तो उन्होंने रक्षात्मक रुख अपनाते हुए कहा, “इस विषय को लेकर एक लिखित शिकायत कार्यालय को प्राप्त हुई है. जिला मुख्यालय के निर्देशानुसार मामले की आंतरिक तकनीकी जांच चल रही है. जांच के तकनीकी प्रतिवेदन आने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा कि दोनों योजनाओं का कार्यक्षेत्र आपस में टकरा (ओवरलैप) रहा है या दोनों के रूट पूरी तरह भिन्न हैं.” फिलहाल जांच रिपोर्ट आने तक संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं.
