सरकारी स्कूलों में वाद्य यंत्र बने शोपीस, संगीत शिक्षक नहीं होने से योजना पर उठने लगे सवाल

कई स्कूलों में डेमेज वाद्य यंत्र पहुंचने की शिकायत भी सामने आई है. कुछ जगहों पर तबला और ढोलक खराब स्थिति में मिलने की बात कही जा रही है. इससे योजना की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं.

ठाकुरगंज प्रखंड के सरकारी विद्यालयों में समग्र शिक्षा अभियान (वार्षिक कार्य योजना 2025-26) के तहत संगीत शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वाद्य यंत्रों का पूरा सेट उपलब्ध कराया गया है. स्कूलों को हारमोनियम, तबला जोड़ी, ढोलक, बैंजो/गिटार, मंजीरा, झांझ तथा घुंघरू दिए गए हैं. सरकार की मंशा बच्चों की सांस्कृतिक प्रतिभा को निखारने की है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह योजना फिलहाल अधूरी नजर आ रही है. अधिकांश स्कूलों में संगीत शिक्षक नहीं होने के कारण ये महंगे और नाजुक उपकरण उपयोग के बजाय कार्यालयों और कमरों में रखे रह गए हैं. कई शिक्षकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सामान्य शिक्षक संगीत उपकरण चलाने में प्रशिक्षित नहीं हैं. ऐसे में बच्चों को सही प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है. वहीं लंबे समय तक उपयोग नहीं होने से उपकरणों के खराब होने की आशंका भी बढ़ गई है. सूत्रों के अनुसार कई स्कूलों में डेमेज वाद्य यंत्र पहुंचने की शिकायत भी सामने आई है. कुछ जगहों पर तबला और ढोलक खराब स्थिति में मिलने की बात कही जा रही है. इससे योजना की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों के कई विद्यालयों में इन उपकरणों को सुरक्षित रखने की समुचित व्यवस्था तक नहीं है. स्कूल प्रबंधन का कहना है कि यदि सरकार संगीत शिक्षकों की नियुक्ति या शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दे, तभी इस योजना का वास्तविक लाभ बच्चों तक पहुंच सकेगा. शिक्षा प्रेमियों के बीच अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि कहीं इस योजना का हाल स्कूलों में स्थापित आईसीटी लैब जैसा न हो जाए. वर्षों पहले आधुनिक शिक्षा के नाम पर आईसीटी लैब बनाए गए थे, लेकिन कंप्यूटर शिक्षकों की पर्याप्त बहाली नहीं होने के कारण इनके संचालन की जिम्मेदारी एनजीओ को सौंप दी गई थी. एनजीओ द्वारा डिप्लोमा प्राप्त कर्मियों की नियुक्ति भी की गई, लेकिन कम मानदेय, अनियमित भुगतान और निगरानी की कमी के कारण कई जगह व्यवस्था प्रभावी नहीं रह सकी. नतीजतन आज कई स्कूलों में आईसीटी लैब बंद पड़े हैं या केवल कागजों तक सीमित होकर रह गए हैं. अब लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते संगीत शिक्षकों की नियुक्ति और उचित प्रशिक्षण की व्यवस्था नहीं हुई, तो लाखों रुपये खर्च कर भेजे गए वाद्य यंत्र भी स्कूलों में धूल फांकते रह जाएंगे और बच्चों की प्रतिभा निखारने का सपना अधूरा रह जाएगा.

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By Awadhesh kumar

अवधेश कुमार विगत 25 वर्षों से पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं. इन्होंने बतौर पत्रकार अपने कैरियर की शुरूआत वर्ष 2001 से की. उसके बाद विगत 15 वर्षो से प्रभात खबर, किशनगंज के कार्यालय प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं. इनकी रूचि राजनीतिक, सामाजिक व अपराध से जुड़ी खबरों में है.

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