वर्तमान समय में बच्चों पर बढ़ रहा है मानसिक दबाव

पढ़ाई, प्रतियोगिता और बढ़ती सामाजिक अपेक्षाओं के बीच बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी चिंता बनता जा रहा है. इसी विषय पर आयोजित संगोष्ठी में अभिभावकों और शिक्षकों ने बच्चों के भावनात्मक विकास पर गंभीर चर्चा की

उच्च माध्यमिक विद्यालय सह उत्क्रमित मध्य विद्यालय, दोगिरजा (दिघलबैंक) में शनिवार को मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण विषय पर अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया.

किशनगंज.

उच्च माध्यमिक विद्यालय सह उत्क्रमित मध्य विद्यालय, दोगिरजा प्रखंड दिघलबैंक में शनिवार को मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण विषय पर अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था.संगोष्ठी में विद्यालय के प्रधानाध्यापक, शिक्षकगण, अभिभावक एवं छात्र-छात्राओं ने भाग लिया. इस दौरान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में मानसिक स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई.वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों पर पढ़ाई, प्रतियोगिता और सामाजिक अपेक्षाओं का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे उनके मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है.शिक्षकों ने अभिभावकों को बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने, उनकी भावनाओं को समझने तथा घर में सकारात्मक और सहयोगात्मक वातावरण प्रदान करने की सलाह दी. साथ ही बताया गया कि बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, चिड़चिड़ापन, आत्मविश्वास में कमी या पढ़ाई में रुचि घटने जैसे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए.संगोष्ठी के दौरान अभिभावकों ने भी अपने विचार साझा किए तथा बच्चों के मानसिक विकास और व्यवहार से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे. शिक्षकों ने उनके प्रश्नों का समाधान करते हुए कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए विद्यालय और परिवार का संयुक्त प्रयास आवश्यक है.वक्ताओं ने कहा कि स्वस्थ मानसिक स्थिति ही बेहतर शिक्षा, अच्छे व्यक्तित्व और उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है. इसलिए बच्चों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्व दिया जाना चाहिए.कार्यक्रम में विद्यालय प्रधान मो. अबुल कासिम, विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष बद्री बातर, शिक्षक जय प्रकाश दास, संजीत कुमार, खुशबू कौसर, आकांक्षा, प्रतिमा सिन्हा, गिरधारी प्रसाद दास, किरण कुमारी, निभा कुमारी, मुश्ताक आलम, दीपक हेम्ब्रम, कौसर आलम सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

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Author: RAVIKANT SINGH

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