किशनगंज से रामबाबू की रिपोर्ट:
ऑनलाइन फार्मेसी के विरोध में केमिस्टों ने खोला मोर्चा
देशव्यापी दवा दुकान बंदी का व्यापक असर किशनगंज जिले में भी देखने को मिल रहा है. एआईओसीडी और बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन द्वारा प्रस्तावित इस एकदिवसीय हड़ताल के समर्थन में जिले के तमाम मेडिकल स्टोर संचालकों ने अपनी दुकानें बंद रखने का फैसला किया है. दवा कारोबारियों का मुख्य विरोध बिना किसी सख्त नियम के धड़ल्ले से चल रही ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर है. इसके अलावा अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर केमिस्टों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
पारंपरिक दवा व्यवसाय और मरीजों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा: संघ
किशनगंज दवा विक्रेता संघ के सचिव जंगी प्रसाद दास ने इस हड़ताल के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री (ई-फार्मेसी) के कारण छोटे और पारंपरिक दवा व्यवसायियों का रोजगार पूरी तरह चौपट हो रहा है. इसके साथ ही उन्होंने एक गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि कई बार बिना उचित डॉक्टरी पर्चे (Prescription) और बिना जांच के दवाएं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. संघ ने सरकार से मांग की है कि दवा जैसे संवेदनशील क्षेत्र की सख्त निगरानी की जाए और स्थानीय दुकानदारों के हितों की रक्षा के लिए कानून बनाया जाए. सचिव ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द विचार नहीं हुआ, तो भविष्य में अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा.
राहत: आपातकालीन सेवाओं के लिए खुली रहेंगी ये 5 दुकानें
दवाइयों की इस बड़ी बंदी को देखते हुए आम लोगों को किसी भी तरह की अनहोनी से बचाने के लिए जरूरी दवाएं पहले से ही खरीद कर रख लेने की सलाह दी गई थी. खासकर नियमित रूप से दवा का सेवन करने वाले बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए यह अलर्ट जरूरी था. हालांकि, मानवीय आधार पर राहत की बात यह है कि जिला प्रशासन और दवा विक्रेता संघ के आपसी समन्वय से जिला मुख्यालय की पांच प्रमुख दवा दुकानों को इस हड़ताल से मुक्त रखा गया है. इन आपातकालीन काउंटरों को खुला रखने का उद्देश्य यह है कि अस्पताल में भर्ती या बेहद गंभीर स्थिति वाले मरीजों को जीवन रक्षक दवाएं समय पर मिल सकें.
