पांजीपाड़ा-सूर्यकमल रेलखंड में ऑटोमेटिक सिग्नलिंग शुरू, तेज और सुरक्षित होगा सफर

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के कटिहार रेल मंडल ने पांजीपाड़ा-किशनगंज-सूर्यकमल रेलखंड के बीच आधुनिक स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग (ABS) प्रणाली को सफलतापूर्वक चालू कर दिया है. लगभग 30 किलोमीटर लंबे इस रूट पर नई तकनीक लागू होने से अब ट्रेनों का परिचालन पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और तेज गति से हो सकेगा.

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट:

हाईटेक हुई सिग्नलिंग प्रणाली, बनाए गए 4 ऑटो सिग्नल हट

रेलवे से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नव स्थापित ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सेक्शन के अंतर्गत कुल पांच स्टेशन आते हैं. इनमें से तीन स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) और दो स्टेशनों पर पैनल इंटरलॉकिंग (PI) प्रणाली काम कर रही है. ट्रेनों के सुगम आवागमन, बेहतर तालमेल और परिचालन संरक्षा को अभेद्य बनाने के उद्देश्य से इस पूरे सेक्शन में चार विशेष ऑटो सिग्नल हट भी स्थापित किए गए हैं.

14 रेल फाटकों में से 6 को किया गया इंटरलॉक

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पांजीपाड़ा और सूर्यकमल के बीच कुल 14 लेवल क्रॉसिंग गेट (रेलवे फाटक) मौजूद हैं. संरक्षा को पुख्ता करने के लिए इनमें से छह व्यस्त गेटों को आधुनिक स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली के साथ सीधे इंटरलॉक कर दिया गया है. इसके अलावा, ट्रैक पर ट्रेनों की सटीक लोकेशन ट्रेस करने के लिए 196 मल्टी सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर (MSDAC) डिटेक्शन प्वाइंट और 40 नए ऑटोमेटिक सिग्नल लगाए गए हैं.

समय पर चलेंगी ट्रेनें, बढ़ेगी रेलखंड की क्षमता

इस आधुनिक स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली के शुरू होने से कटिहार मंडल के इस बेहद महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की लाइन क्षमता में भारी इजाफा होगा. एक ही ट्रैक पर सुरक्षित दूरी बनाकर एक के पीछे दूसरी ट्रेन को आसानी से चलाया जा सकेगा, जिससे ट्रेनों के लेट-लतीफ होने की समस्या खत्म होगी और समयपालन (Punctuality) में बड़ा सुधार आएगा. तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक, यह अपग्रेड रेल हादसों की आशंका को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा.

गुवाहाटी तक योजना के विस्तार की तैयारी

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने बीते वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अपने पूरे नेटवर्क पर संरक्षा और सिग्नलिंग उन्नयन को लेकर कई बड़े रिकॉर्ड बनाए हैं. इस अवधि में एनएफआर द्वारा 24 इंटरलॉक्ड लेवल क्रॉसिंग गेट स्थापित किए गए, पांच पुराने पैनलों को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदला गया और 25 स्लाइडिंग बूम लगाए गए. रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस रूट के सफल ट्रायल के बाद अब भविष्य में इस ऑटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली का विस्तार असम के गुवाहाटी तक करने की योजना है, जिससे पूरे नॉर्थ-ईस्ट का रेल नेटवर्क अत्याधुनिक हो जाएगा.

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Published by: Divyanshu Prashant

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