निर्माणाधीन पुल के पास से ही निकाली जा रही महानंदा नदी की बालू! संपर्क पथ निर्माण पर उठे गंभीर सवाल

किशनगंज के ठाकुरगंज में महानंदा नदी पर बन रहे नए पुल के निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि संपर्क पथ के लिए पुल के पास से ही नदी की बालू निकाली जा रही है, जिससे पुल की नींव की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है.

किशनगंज जिले के ठाकुरगंज में महानंदा नदी पर बन रहे नए पुल के संपर्क पथ (एप्रोच रोड) के निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. आरोप है कि संपर्क पथ तैयार करने के लिए पुल के बिल्कुल पास से ही महानंदा नदी का सीना चीरकर बालू निकाली जा रही है. पिछले एक सप्ताह से रोजाना सुबह जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली की मदद से हो रहे इस बालू उठाव ने नदी के बहाव और पुल की नींव की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

सुबह के वक्त 2 घंटे चलती है जेसीबी, ट्रैक्टर से ढोई जा रही बालू

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी और तस्वीरों के अनुसार, पिछले करीब एक सप्ताह से रोजाना सुबह के वक्त यह खेल चल रहा है:

  • जेसीबी से खुदाई: सुबह करीब दो घंटे तक नदी के अंदर जेसीबी मशीन लगाकर धड़ल्ले से बालू निकाली जाती है.
  • ट्रैक्टर-ट्रॉली से ढुलाई: नदी से निकाली गई बालू को ट्रैक्टर-ट्रॉली में लादकर सीधे संपर्क पथ के निर्माण स्थल तक पहुंचाया जा रहा है.
  • अनुमति पर सवाल: स्थानीय लोगों और जानकारों के बीच यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या पुल के ठीक बगल से ही नदी की बालू निकालने की कोई आधिकारिक अनुमति मिली है?
पुल के बगल से बालू निकलता पोकलेन | Prabhat Khabar Network

पुल की नींव और कटाव को लेकर बढ़ा तकनीकी खतरा

यह पूरा मामला इसलिए ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि खुदाई का काम सीधे निर्माणाधीन पुल के बेहद करीब हो रहा है:

  • पिलर की सुरक्षा: नदी के तल में बिना तकनीकी जांच और अनियंत्रित तरीके से खुदाई करने से नदी की धारा में बदलाव और तेज कटाव का खतरा बढ़ जाता है.
  • पुल की लाइफ पर असर: नदी की तलहटी से नजदीकी दूरी पर बालू हटने से भविष्य में नए पुल के पिलर और नींव की मजबूती प्रभावित हो सकती है.

क्या कहते हैं पुल निर्माण निगम के अधिकारी?

इस पूरे मामले पर बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर शैलेश कुमार ने सफाई देते हुए कहा:

"पुल निर्माण के लिए फिलहाल पहले बेड तैयार किया जा रहा है. बेड तैयार होने के बाद पाकुड़ के स्टोन चिप्स (पत्थर) का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके बाद निर्धारित डिजाइन और मानकों के अनुसार ही आगे का निर्माण कार्य कराया जाएगा."

निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग

अधिकारियों के बयान के बावजूद स्थानीय स्तर पर सवाल बरकरार है कि पुल के करीब से निकाली जा रही बालू का इस्तेमाल संपर्क पथ के किस हिस्से में किया जा रहा है और क्या इसके लिए कोई तकनीकी प्रावधान है. स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि क्षेत्र के विकास के लिए नए पुल का बनना बेहद जरूरी है, लेकिन निर्माण कार्य के दौरान नदी के बहाव और पुल की दीर्घकालिक सुरक्षा मानकों की अनदेखी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >