किशनगंज में बादलों की आवाजाही के बीच हल्की बारिश के आसार: 34 डिग्री तक रहेगा पारा, वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी

किशनगंज में बुधवार से शुरू होने वाली हल्की से मध्यम बारिश से मौसम में बदलाव आएगा. आसमान में बादलों की आवाजाही और 34°C तक तापमान रहने की उम्मीद है. किसानों को फसलों के लिए यह बारिश फायदेमंद साबित होगी, लेकिन वज्रपात से बचने की सलाह दी गई है.

किशनगंज जिले में बुधवार को मौसम के तेवर में बदलाव देखने को मिलेगा. मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, सुबह से ही आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और जिले के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश दर्ज की जा सकती है. बादलों के छाए रहने से उमस से हल्की राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि दिन का अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लगभग 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने की संभावना है.

मौसम विभाग के मुताबिक, सीमांचल के तराई इलाके में बने सिस्टम के प्रभाव से बुधवार के अलावा गुरुवार को भी बूंदाबांदी और रुक-रुक कर बारिश का यह दौर जारी रह सकता है.

सभी प्रखंडों में दिखेगा मौसमी उतार-चढ़ाव

जिले के सभी प्रखंडों में बादलों की सक्रियता का प्रभाव देखने को मिलेगा:

  • प्रभावित प्रखंड: जिला मुख्यालय किशनगंज सहित कोचाधामन, बहादुरगंज, दिघलबैंक, ठाकुरगंज, पोठिया, टेढ़ागाछ और पलासी प्रखंड क्षेत्र में बादलों का डेरा रहेगा और स्थानीय स्तर पर बूंदाबांदी हो सकती है.
  • सावधानी की अपील: स्थानीय प्रशासन और मौसम विशेषज्ञों ने बारिश के दौरान अनावश्यक रूप से खुले में निकलने से बचने की सलाह दी है.

किशनगंज मौसम सारांश एवं प्रमुख आंकड़े

मौसम घटक (Parameter)अनुमानित स्थिति / आंकड़े
अधिकतम तापमान (Max Temp)~34°C
न्यूनतम तापमान (Min Temp)~26°C
आसमान की स्थितिआंशिक से सामान्य रूप से बादलों से घिरा
वर्षा का पूर्वानुमानहल्की बारिश / बूंदाबांदी (बुधवार एवं गुरुवार)
मुख्य प्रभाव क्षेत्रसभी 8 प्रखंड (किशनगंज, बहादुरगंज, ठाकुरगंज, पोठिया आदि)

धान व खरीफ फसलों को संजीवनी, लेकिन वज्रपात से सतर्क रहें किसान

कृषि वैज्ञानिकों और जिला कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष परामर्श जारी किया है:

  • फसलों के लिए लाभदायक: वर्तमान समय में धान की फसल को पानी की अत्यधिक आवश्यकता है. ऐसे में यह बारिश धान सहित अन्य मौसमी खरीफ फसलों की बढ़वार के लिए संजीवनी का काम करेगी और सिंचाई की लागत में बचत होगी.
  • वज्रपात (आकाशीय बिजली) से बचाव: मौसम में अचानक बदलाव, तेज हवाओं अथवा बादलों की तेज गड़गड़ाहट के दौरान किसान खेतों में कार्य करने से बचें. वज्रपात की आशंका को देखते हुए ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों या खुले मैदानों में शरण न लें और सुरक्षित पक्के निर्माण की ओर जाएं.

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लेखक के बारे में

By गौरव कुमार

गौरव कुमार प्रिंट माध्यम में 20 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 10 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. राजनीतिक, सामाजिक व अपराध की खबरों में विशेष रूचि है.

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