Kishanganj News: किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड में शुक्रवार को मातृ स्वास्थ्य और पोषण जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आंगनबाड़ी केंद्र नयाबस्ती, केंद्र संख्या-120 में गोद भराई दिवस का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का संचालन सेविका गुंचा बेगम के नेतृत्व में किया गया.
यह कार्यक्रम प्रत्येक माह की 7 तारीख को आयोजित किया जाता है, जिसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार, सुरक्षित मातृत्व, नियमित स्वास्थ्य जांच और पोषण संबंधी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना है.
पारंपरिक गोद भराई के साथ मातृत्व का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान गर्भवती महिलाओं की पारंपरिक गोद भराई की रस्में संपन्न कर उन्हें स्वस्थ मातृत्व की शुभकामनाएं दी गईं.
आयोजन में उपस्थित महिलाओं के बीच मातृत्व से जुड़ी सकारात्मक सोच, परिवार के सहयोग और गर्भावस्था के दौरान सावधानियों पर भी चर्चा की गई.
संतुलित पोषण पर दिया गया विशेष जोर
सेविका गुंचा बेगम ने गर्भवती महिलाओं को बताया कि गर्भावस्था के दौरान संतुलित और पौष्टिक आहार लेना अत्यंत आवश्यक है.
उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को दस में से कम से कम पांच खाद्य समूहों का नियमित सेवन करना चाहिए, ताकि शरीर को आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिल सकें और गर्भस्थ शिशु का समुचित विकास हो.
IFA और कैल्शियम की गोलियां नियमित लेने की सलाह
कार्यक्रम में महिलाओं को आयरन-फोलिक एसिड (IFA) और कैल्शियम की गोलियों के महत्व के बारे में भी विस्तार से बताया गया.
सेविका ने कहा कि इन दवाओं का नियमित सेवन करने से एनीमिया की रोकथाम, हड्डियों की मजबूती और गर्भावस्था के दौरान कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचाव संभव होता है.
प्रसव पूर्व जांच (ANC) क्यों है जरूरी?
कार्यक्रम में प्रसव पूर्व जांच (ANC) की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया.
महिलाओं को बताया गया कि समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने से गर्भावस्था के दौरान होने वाली संभावित जटिलताओं की समय रहते पहचान की जा सकती है, जिससे उचित उपचार संभव हो पाता है और मां तथा शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है.
Kishanganj News: महिलाओं ने लिया नियमित स्वास्थ्य जांच का संकल्प
कार्यक्रम में शामिल गर्भवती महिलाओं ने स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जानकारी को उपयोगी बताते हुए नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, संतुलित भोजन लेने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने का संकल्प लिया.
सेविका गुंचा बेगम ने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने, स्वस्थ मातृत्व को बढ़ावा देने और समुदाय में पोषण के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
कार्यक्रम के अंत में सभी गर्भवती महिलाओं को नियमित जांच, पौष्टिक आहार, IFA एवं कैल्शियम का सेवन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं का लाभ लेने का संदेश दिया गया.
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