Kishanganj News: ठाकुरगंज में चेहल्लुम के अवसर पर धार्मिक आस्था और परंपरा का भव्य संगम देखने को मिला. शनिवार शाम विभिन्न मोहल्लों में गवारा घुमाने की रस्म अदा की गई, जबकि रविवार को ताजिया और निशान के साथ मुख्य जुलूस निकाला गया. जुलूस में शामिल लोग इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए आगे बढ़ रहे थे.
इमाम हुसैन की शहादत को किया याद
जुलूस के दौरान अकीदतमंद धार्मिक कलाम पढ़ते हुए चल रहे थे. “दीन-ए-खुदा की राह में सब कुछ लुटा दिया, एहसान बड़े दीन पर तुम्हारे हुसैन हैं” जैसे कलामों के साथ श्रद्धालुओं ने कर्बला की याद को ताजा किया.
जुलूस में शामिल लोगों ने शांति, भाईचारे और इंसाफ के संदेश को भी प्रमुखता से रखा. स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या इस धार्मिक आयोजन को देखने के लिए मार्ग के विभिन्न हिस्सों में मौजूद रही.
अखाड़ों के करतब बने आकर्षण का केंद्र
जुलूस के रास्ते में कई स्थानों पर पारंपरिक अखाड़ों ने खेल और हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया. युवाओं और बच्चों में इन प्रदर्शनों को लेकर विशेष उत्साह देखा गया.
अखाड़ों की प्रस्तुति ने पूरे आयोजन को सांस्कृतिक और पारंपरिक रंग प्रदान किया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे जुटे रहे.
मस्तान चौक से कर्बला तक निकला जुलूस
चेहल्लुम का जुलूस मस्तान चौक से शुरू होकर मुख्य सड़क, बस पड़ाव, ठाकुरगंज थाना, सोनार पट्टी, नेहरू रोड, पुनः मस्तान चौक और कॉलेज मोड़ होते हुए कर्बला पहुंचा.
कर्बला पहुंचने के बाद ताजिया और निशान के साथ शामिल लोगों ने धार्मिक रस्में अदा कीं और इमाम हुसैन की शहादत को श्रद्धांजलि दी.
सुरक्षा के रहे व्यापक इंतजाम
जुलूस को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. पूरे जुलूस मार्ग पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी गई.
स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति के समन्वय से पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ.
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Kishanganj News: कमेटी ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
चालीसा मोहर्रम एकता कमेटी, बशीरनगर ठाकुरगंज के अध्यक्ष मोहम्मद सोहराब उर्फ मुन्ना, सचिव मोहम्मद शमशाद तथा सदस्य गुलाम मुर्तुजा, मोहम्मद नजरुल शाह और मोहम्मद लाडला सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने जुलूस के सफल आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई.
स्थानीय लोगों ने भी आयोजन समिति और प्रशासन की व्यवस्था की सराहना की और कहा कि धार्मिक आयोजन आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश देते हैं.
