Kishanganj News: बिहार सरकार ने जमीन निबंधन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. किशनगंज में दूसरे चरण के तहत इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद निबंधन कार्यालय परिसर में इससे जुड़े लोगों की चिंता खुलकर सामने आई. गुरुवार को मुंशियों और स्टांप वेंडरों ने बैठक कर नई प्रणाली से उत्पन्न हो रही व्यावहारिक समस्याओं और रोजगार पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर अपनी बात रखी.
बैठक में मौजूद लोगों का कहना था कि ऑनलाइन और पेपरलेस प्रक्रिया लागू होने के बाद निबंधन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक समय लेने लगी है. तकनीकी औपचारिकताओं के बढ़ने से न केवल आम नागरिकों को, बल्कि दस्तावेज तैयार कराने वाले पेशेवर लोगों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
डिजिटल प्रक्रिया से ग्रामीण और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
मुंशियों का कहना है कि सीमांचल क्षेत्र, विशेषकर किशनगंज में बड़ी संख्या में ग्रामीण और बुजुर्ग लोग डिजिटल प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित नहीं हैं. ऐसे लोगों को ऑनलाइन दस्तावेज, डिजिटल सत्यापन और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं को समझने में परेशानी हो रही है.
उनका कहना है कि पहले जहां दस्तावेज तैयार कराने और रजिस्ट्री प्रक्रिया में स्थानीय मुंशियों और स्टांप वेंडरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी, वहीं नई व्यवस्था के कारण उनके काम में कमी आने लगी है. इससे उनकी आय और रोजगार पर सीधा असर पड़ रहा है.
निबंधन में समय बढ़ने की शिकायत
बैठक में शामिल लोगों ने कहा कि पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री प्रक्रिया में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है. तकनीकी समस्याएं, इंटरनेट आधारित प्रक्रिया और नई औपचारिकताओं के कारण कई मामलों में कार्य पूरा होने में देरी हो रही है.
मुंशियों और स्टांप वेंडरों ने सरकार से इस व्यवस्था की समीक्षा करने और स्थानीय स्तर पर उत्पन्न हो रही समस्याओं को दूर करने की मांग की. उनका कहना है कि यदि आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो रोजगार का संकट और गहरा सकता है.
सरकार का दावा- भविष्य में मिलेगा बड़ा लाभ
दूसरी ओर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पेपरलेस निबंधन व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, रिकॉर्ड को सुरक्षित बनाना और फर्जीवाड़े पर प्रभावी रोक लगाना है.
अधिकारियों के अनुसार नई प्रणाली के शुरुआती चरण में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें आना स्वाभाविक है, लेकिन समय के साथ प्रक्रिया सरल होगी और लोगों को अधिक सुविधा मिलेगी. उन्होंने बताया कि किशनगंज में यह व्यवस्था दूसरे चरण के तहत लागू की गई है और भविष्य में इसका लाभ आम नागरिकों को मिलेगा.
Kishanganj News: डिजिटल बदलाव और स्थानीय रोजगार के बीच संतुलन की चुनौती
पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था ने एक ओर प्रशासनिक पारदर्शिता और रिकॉर्ड सुरक्षा की दिशा में नई संभावनाएं खोली हैं, तो दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार और तकनीकी पहुंच का सवाल भी सामने ला दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डिजिटल व्यवस्था के साथ प्रशिक्षण, सहायता केंद्र और स्थानीय सहयोग तंत्र को मजबूत किया जाए, तो इस बदलाव को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाया जा सकता है.
फिलहाल किशनगंज निबंधन कार्यालय में नई व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज है और सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार स्थानीय स्तर की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाती है.
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