किशनगंज के चार स्टेशनों पर बिना रुके गुजर गई इंटरसिटी एक्सप्रेस, प्लेटफॉर्म पर छूट गए यात्री

Kishanganj Intercity Express : घंटों से ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों को उस समय बड़ा झटका लगा, जब हल्दीबाड़ी-बालुरघाट इंटरसिटी एक्सप्रेस नक्सलबाड़ी, अधिकारी, गलगलिया और तैयबपुर स्टेशन पर बिना रुके तेज रफ्तार से गुजर गई. हाथों में टिकट था, मंजिल तय थी, लेकिन ट्रेन नहीं रुकी.

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Kishanganj Intercity Express : रविवार की दोपहर किशनगंज के नक्सलबाड़ी, अधिकारी, गलगलिया और तैयबपुर स्टेशन पर यात्रियों की उम्मीदें उस वक्त टूट गईं, जब 15464 हल्दीबाड़ी-बालुरघाट इंटरसिटी एक्सप्रेस निर्धारित ठहराव के बावजूद इन स्टेशनों पर नहीं रुकी. ट्रेन के अचानक बिना रुके गुजर जाने से यात्रियों में भारी नाराजगी देखी गई. घटना के बाद रेलवे प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं.

घंटों का इंतजार, लेकिन नहीं रुकी ट्रेन

रविवार दोपहर चारों स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में यात्री ट्रेन का इंतजार कर रहे थे. यात्रियों के हाथों में टिकट था और वे अपने गंतव्य तक पहुंचने की तैयारी में थे. जैसे ही दूर से इंटरसिटी एक्सप्रेस की सीटी सुनाई दी, लोगों ने सामान समेटना शुरू कर दिया. बच्चों और बुजुर्गों के चेहरे पर भी खुशी दिखाई दी. लेकिन ट्रेन स्टेशन पर रुकने के बजाय तेज रफ्तार से प्लेटफॉर्म पार कर गई.

यात्रियों में फूटा गुस्सा

ट्रेन के नहीं रुकने से यात्रियों में भारी आक्रोश देखा गया. कई यात्रियों ने सवाल उठाया कि जब ट्रेन को रुकना ही नहीं था, तो टिकट की बिक्री क्यों की गई. लोगों का कहना था कि रेलवे को यात्रियों के समय और आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी लेनी चाहिए.

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टिकट लौटाने पड़े, हॉल्ट प्रबंधन भी परेशान

तैयबपुर हॉल्ट के संचालक मदन पांडे ने बताया कि रविवार को हरिश्चंद्रपुर, शम्सी, एकलखी समेत विभिन्न स्टेशनों के लिए करीब दो हजार रुपये के टिकट बेचे गए थे. लेकिन ट्रेन के नहीं रुकने के कारण सभी यात्रियों को टिकट राशि वापस करनी पड़ी. इससे हॉल्ट प्रबंधन को भी असहज स्थिति का सामना करना पड़ा.

Kishanganj Intercity Express: रेलवे प्रशासन से जांच की मांग

इस घटना ने स्थानीय लोगों और यात्रियों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं. लोगों ने रेलवे प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं से यात्रियों का रेलवे पर भरोसा कमजोर होता है.

प्लेटफॉर्म पर इंतजार था, टिकट था, मंजिल थी और सामने से आती ट्रेन भी थी. जो नहीं था, वह सिर्फ एक ठहराव था. इंटरसिटी आई, सीटी बजाई और चार स्टेशनों की उम्मीदों को पीछे छोड़ती हुई आगे बढ़ गई.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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