किशनगंज: कॉलेज ऑफ फिशरीज को ICAR से मिली मान्यता, अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में मिला 'सर्वोत्कृष्ट संस्थान पुरस्कार'

किशनगंज का मात्स्यिकी महाविद्यालय ICAR से मान्यता और 'सर्वोत्कृष्ट संस्थान पुरस्कार-2025' प्राप्त कर शिक्षा, अनुसंधान में अग्रणी. पूरी जानकारी.

पोठिया (किशनगंज). बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के अधीन संचालित मात्स्यिकी महाविद्यालय (कॉलेज ऑफ फिशरीज), किशनगंज ने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. महाविद्यालय को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), नई दिल्ली के राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रत्यायन बोर्ड द्वारा मात्स्यिकी विज्ञान के स्नातक एवं विभिन्न स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए मान्यता प्रदान की गई है. वहीं वर्ष 2025 में संस्थान को सर्वोत्कृष्ट संस्थान पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है.

आईसीएआर मान्यता से मजबूत हुई अकादमिक पहचान

महाविद्यालय के अनुसार आईसीएआर के राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रत्यायन बोर्ड की मान्यता संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अकादमिक अधोसंरचना, अनुसंधान और शैक्षणिक मानकों के प्रति किए जा रहे प्रयासों को दर्शाती है.

मात्स्यिकी विज्ञान के क्षेत्र में उच्च शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को अनुसंधान और व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर भी महाविद्यालय की ओर से जोर दिया जा रहा है.

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मिला सर्वोत्कृष्ट संस्थान पुरस्कार

महाविद्यालय को जैविक और प्राकृतिक धान उत्पादन प्रणाली पर आयोजित 5वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वोत्कृष्ट संस्थान पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया गया. यह सम्मेलन अखिल भारतीय कृषि छात्र संघ, नई दिल्ली, कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, रायचूर और आईपीबी विश्वविद्यालय, इंडोनेशिया द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था.

महाविद्यालय के अनुसार पुरस्कार से संबंधित प्रमाण-पत्र में कॉलेज ऑफ फिशरीज, किशनगंज को वर्ष 2025 के लिए उत्कृष्ट संस्थान के रूप में मान्यता दी गई है. संस्थान ने इस सम्मान को शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की पहचान बताया है.

प्राध्यापक को युवा वैज्ञानिक, छात्र को सर्वश्रेष्ठ छात्र पुरस्कार

महाविद्यालय की उपलब्धियों में व्यक्तिगत स्तर पर मिले सम्मान भी शामिल हैं. कॉलेज के प्राध्यापक आशुतोष कुमार सिंह को युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. वहीं महाविद्यालय के छात्र अनिल कुमार को सर्वश्रेष्ठ छात्र पुरस्कार प्रदान किया गया. संस्थान के अनुसार इन सम्मानों से महाविद्यालय के शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है.

कुलपति ने पूरी टीम को दी बधाई

इन उपलब्धियों पर बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के कुलपति डॉ. इंद्रजीत सिंह ने मात्स्यिकी महाविद्यालय, किशनगंज की पूरी टीम को बधाई दी. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे सामूहिक प्रयासों का परिणाम इन उपलब्धियों के रूप में सामने आया है.

उन्होंने महाविद्यालय की अकादमिक उपलब्धियों को विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय बताया.

डीन ने शिक्षकों और विद्यार्थियों की मेहनत को बताया आधार

मात्स्यिकी महाविद्यालय, किशनगंज के अधिष्ठाता सह डीन डॉ. वी. पी. सैनी ने भी शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को बधाई दी. उन्होंने कहा कि आईसीएआर की मान्यता, सर्वोत्कृष्ट संस्थान पुरस्कार तथा शिक्षक और छात्र को मिले व्यक्तिगत सम्मान पूरी महाविद्यालयीन टीम की मेहनत, समर्पण और सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं.

कई विषयों में संचालित हो रहे स्नातकोत्तर कार्यक्रम

मात्स्यिकी महाविद्यालय में मत्स्य विज्ञान स्नातक पाठ्यक्रम के साथ विभिन्न विषयों में स्नातकोत्तर कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं. इनमें जलीय कृषि (एक्वाकल्चर), मत्स्य संसाधन प्रबंधन, मछली प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी, मछली पोषण एवं आहार प्रौद्योगिकी, मछली शरीर क्रिया-विज्ञान एवं जैव-रसायन, मात्स्यिकी जैव प्रौद्योगिकी, जलीय जीव स्वास्थ्य प्रबंधन और जलीय पर्यावरण प्रबंधन शामिल हैं.

सीमांचल में मत्स्य शिक्षा और उद्यमिता को मिलेगी मजबूती

महाविद्यालय की इन उपलब्धियों से किशनगंज और सीमांचल क्षेत्र में उच्चस्तरीय मात्स्यिकी शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास और उद्यमिता को मजबूती मिलने की उम्मीद है. संस्थान में संचालित विभिन्न पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को मत्स्य पालन, जलीय कृषि, प्रसंस्करण और संबंधित क्षेत्रों में अध्ययन एवं शोध के अवसर उपलब्ध कराते हैं. महाविद्यालय की राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान से बिहार में मात्स्यिकी शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं को भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है.

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लेखक के बारे में

By विद्यानंद मेहता

विद्यानंद मेहता ने वर्ष 2012 में प्रिंट माध्यम से पत्रकारिता की शुरुआत की. पत्रकारिता के क्षेत्र मे स्थानीय लोगों की मूलभूत समस्याओं को प्रमुखता से लिखना और शिक्षा व स्वास्थ्य में रुचि रखते हैं.

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