UPSC: बिहार के किशनगंज जिले की जूही दास की सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह अदम्य साहस और मानसिक मजबूती की मिसाल है. यूपीएससी (UPSC) के नतीजों में जूही ने 649वीं रैंक हासिल कर पूरे प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है.
इन परिस्थितियों में दिया इंटरव्यू
जूही के लिए यह सफर सबसे कठिन तब हो गया जब उनके पिता का निधन इंटरव्यू से ठीक पहले 13 फरवरी को हो गया. जूही ने केवल अपने पिता को मुखाग्नि दी और 11 दिन बाद 24 फरवरी को यूपीएससी के इंटरव्यू में शामिल हुईं.
मां से मिली प्रेरणा
जूही के पिता मोटर पार्ट्स की दुकान चलाते थे और मां अन्निका दास एक न्यायमित्र हैं. जूही की मां भी कभी यूपीएससी की उम्मीदवार रही थीं, लेकिन तब उन्हें सफलता नहीं मिल पाई थी. मां के उसी अधूरे सपने को अपनी आंखों में सजाकर जूही ने तैयारी शुरू की. उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान में जाने के बजाय घर पर ही रहकर ऑनलाइन नोट्स की मदद से पढ़ाई की.
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शानदार रहा है एकेडमिक करियर
जूही शुरू से ही पढ़ने में काफी तेज रही हैं. किशनगंज के बाल मंदिर स्कूल से मैट्रिक और विशाखापट्टनम से इंटर करने के बाद उन्होंने कोलकाता से बीटेक की डिग्री ली. यह उनका चौथा प्रयास था. इससे पहले भी वे दो बार इंटरव्यू तक पहुंची थीं, लेकिन मेरिट लिस्ट में नाम नहीं आ पाया था. इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने परीक्षा पास किया. जूही की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो बड़ी से बड़ी विपदा भी रास्ता नहीं रोक सकती.
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