बिहार में जमाबंदी की गलतियां होंगी दूर, 45 दिनों का विशेष अभियान : खाता-खेसरा से लेकर रैयत के नाम तक सुधरेंगे रिकॉर्ड

बिहार में जमीन के रिकॉर्ड दुरुस्त करने के लिए 45 दिन का विशेष अभियान शुरू हो रहा है. इसमें जमाबंदी, खाता, खेसरा और रैयत के नाम से जुड़ी गलतियां सुधारी जाएंगी. लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी.

किशनगंज : बिहार में जमीन के रिकॉर्ड को दुरुस्त करने और जमाबंदी से जुड़ी त्रुटियों के समाधान के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग 45 दिनों का विशेष अभियान चलाएगा. इस अभियान के तहत जमाबंदी में दर्ज खाता, खेसरा, प्लॉट संख्या और रैयत के नाम से जुड़ी गलतियों को नियमानुसार सुधारा जाएगा. जरूरत पड़ने पर जमीन की मुफ्त मापी भी करायी जाएगी.

लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से मिलेगी राहत

राजस्व मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि जमीन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. अधिकारी और कर्मचारी लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनेंगे और नियमानुसार उनका समाधान करेंगे.

सीओ और राजस्व अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी

जमाबंदी शुद्धीकरण अभियान की जिम्मेदारी अंचल अधिकारियों को दी गयी है. सीओ और राजस्व अधिकारी लोगों से संवाद कर जमीन से संबंधित शिकायतों की जानकारी लेंगे और मामलों का नियमानुसार निष्पादन करेंगे.

मंत्री ने अधिकारियों को किसी भी मामले में भेदभाव या पिक एंड चूज की कार्यशैली से बचने का निर्देश दिया है.

मुख्यालय से रोजाना होगी अभियान की निगरानी

अभियान की प्रगति की मुख्यालय स्तर से रोजाना निगरानी की जाएगी. विभाग की विशेष टीमें विभिन्न जिलों में जाकर अभियान के तहत किये जा रहे कार्यों की गुणवत्ता की जांच करेंगी. इसका उद्देश्य लोगों की शिकायतों का समय पर और सही तरीके से समाधान सुनिश्चित करना है.

इन पांच जिलों के 1000 से अधिक गांव होंगे शामिल

अरवल, जहानाबाद, शेखपुरा, शिवहर और लखीसराय जिले के एक हजार से अधिक गांवों को इस अभियान में शामिल किया जाएगा. इन गांवों का जल्द नोटिफिकेशन किया जाएगा.

नोटिफिकेशन के तीन महीने के भीतर एडीएम कोर्ट में अपील करने का प्रावधान रहेगा.

नए सर्वे वाले जिलों में स्पेशियल म्यूटेशन

नए सर्वे वाले जिलों में स्पेशियल म्यूटेशन की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी. इसमें जमीन के विवरण के साथ उसका नक्शा भी उपलब्ध रहेगा. इससे रैयतों को अपनी जमीन और उससे जुड़े रिकॉर्ड की स्थिति समझने में सुविधा होगी.

इस अभियान का उद्देश्य जमीन के रिकॉर्ड में दर्ज त्रुटियों को दूर करना और रैयतों को जमाबंदी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए सरल व्यवस्था उपलब्ध कराना है.

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लेखक के बारे में

By गौरव कुमार

गौरव कुमार प्रिंट माध्यम में 20 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 10 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. राजनीतिक, सामाजिक व अपराध की खबरों में विशेष रूचि है.

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