ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Jagannath Temple Road: सीमावर्ती किशनगंज जिले के ठाकुरगंज नगर क्षेत्र से ड्रेनेज (जलनिकासी) व्यवस्था की पोल खोलती एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है. शहरवासियों की अगाध श्रद्धा और आस्था के प्रमुख केंद्र ‘जगन्नाथ मंदिर’ के ठीक सामने की मुख्य संपर्क सड़क इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा के कारण नरकीय स्थिति में तब्दील हो चुकी है. मंदिर मार्ग पर स्थित घरों और नालियों से निकलने वाला बदबूदार गंदा पानी लगातार बीच सड़क पर ओवरफ्लो होकर बह रहा है. इसके चलते पूरी सड़क पर घुटने तक कीचड़ और जलजमाव की स्थिति बनी रहती है, जो न केवल नगर परिषद के स्वच्छता दावों पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि स्थानीय दुकानदारों व राहगीरों के स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बन गई है.
सुबह 5 बजे से ही कीचड़ के बीच से गुजरने को विवश हैं हजारों श्रद्धालु
मंदिर मार्ग की इस बदहाली और आम जनता की रोजमर्रा की दिक्कतों का सिलसिलेवार विवरण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
- धार्मिक भावनाओं को ठेस: स्थानीय नागरिकों के अनुसार, प्रतिदिन सुबह 05:00 बजे से ही ठाकुरगंज और आसपास के देहाती इलाकों से हजारों की संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु, बुजुर्ग और बच्चे इसी पवित्र मार्ग से होकर जगन्नाथ मंदिर सहित शहर के अन्य शिवालयों व मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए निकलते हैं. पवित्र भाव से पूजा की थाली लेकर जा रहे श्रद्धालुओं के पैर इस गंदे पानी और नाले के कीचड़ में पड़ जाते हैं, जिससे उनकी धार्मिक शुचिता प्रभावित होती है.
- साप्ताहिक हाट के दिन बढ़ती है आफत: सोमवार और शुक्रवार को इस ऐतिहासिक मार्ग पर लगने वाले पारंपरिक साप्ताहिक हाट (बाजार) के दौरान स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो जाती है. हाट के दिनों में सैकड़ों छोटे-बड़े दुकानदार और हजारों ग्रामीण खरीदार इसी संकरी व कीचड़युक्त सड़क का उपयोग करने को मजबूर होते हैं, जिससे यहाँ घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है.
स्पीड ब्रेकर न होने से राहगीरों पर उड़ता है गंदा पानी, हादसे की आशंका
बेलगाम वाहनों का कहर: स्थानीय दुकानदारों और निवासियों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि सड़क के इस हिस्से पर कोई ‘स्पीड ब्रेकर’ (गति अवरोधक) नहीं बनाया गया है. इसके चलते मुख्य बाजार की ओर जाने वाले तेज रफ्तार चार पहिया वाहन और मोटरसाइकिल चालक सड़क पर जमा नाले के बदबूदार पानी और कीचड़ को परवाह किए बिना तेजी से निकल जाते हैं. इस लापरवाही के कारण कीचड़ की छीटें सड़क किनारे पैदल चल रहे श्रद्धालुओं और स्कूली बच्चों के कपड़ों पर उड़ती हैं, जिससे आए दिन यहाँ विवाद और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.
वर्षों पुरानी समस्या पर मौन हैं जनप्रतिनिधि, स्थायी ड्रेनेज की मांग
स्थानीय आक्रोश और प्रशासनिक उदासीनता:
हैरानी की बात यह है कि वर्षों से बनी इस विकराल समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर परिषद, संबंधित लोक निर्माण विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा अब तक कोई ठोस बजटीय या धरातलीय पहल नहीं की गई है. चुनाव के समय किए गए वादे अब तक सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं.
ठाकुरगंज के संभ्रांत नागरिकों और युवाओं ने अनुमंडल प्रशासन और नगर परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी से पुरजोर मांग की है कि:
- स्थायी नाला निर्माण: मंदिर मार्ग के दोनों तरफ पक्के और ढके हुए नालों का निर्माण कराया जाए, ताकि घरों का पानी सीधे मुख्य ड्रेनेज में गिरे.
- सड़क सुदृढ़ीकरण व मरम्मत: कीचड़ से पूरी तरह टूट चुकी इस सड़क का अविलंब कालीकरण (पीचिंग) कराया जाए.
- गति अवरोधक का निर्माण: मंदिर के ठीक सामने राहगीरों की सुरक्षा के लिए दो मजबूत स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं.
नगरवासियों का साफ कहना है कि आस्था, व्यापार और जनसुविधा से जुड़े इस अति महत्वपूर्ण मार्ग की ऐसी घोर उपेक्षा अब कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यदि शीघ्र ही नाले के पानी का डायवर्जन नहीं किया गया, तो स्थानीय लोग उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.
