किशनगंज से गौरव कुमार की रिपोर्ट
Indo-Nepal Border: भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने ‘रोटी-बेटी’ के मैत्रीपूर्ण संबंधों को अक्षुण्ण रखने और खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा का फायदा उठाकर होने वाली अवैध गतिविधियों पर कड़ा प्रहार करने के लिए रविवार को सीमा पर एक बड़ा अभियान देखा गया. किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 12वीं बटालियन फतेहपुर और नेपाल की सशस्त्र प्रहरी बल यानी आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) के जवानों ने एक साथ कदमताल करते हुए संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में ‘संयुक्त गश्ती अभियान’ चलाया. इस दौरान सीमा क्षेत्र के नो-मैन्स लैंड (No Man’s Land) और प्रमुख पगडंडियों पर सुरक्षा बलों ने मार्च कर अपनी मुस्तैदी का परिचय दिया.
बॉर्डर पिलर 151 से 152 के बीच पैदल मार्च; इन अधिकारियों ने किया नेतृत्व
- कमांड और नेतृत्व: इस उच्चस्तरीय संयुक्त गश्ती का नेतृत्व भारतीय सीमा की ओर से एसएसबी 12वीं बटालियन फतेहपुर (बीओपी फतेहपुर) के उपनिरीक्षक (जीडी) अडहारी लोसा ने किया, जबकि नेपाल की तरफ से सशस्त्र प्रहरी बल (APF) के डीएसपी किशोर श्रेष्ठ ने अपने जवानों की कमान संभाली.
- संवेदनशील जोन पर नजर: दोनों देशों के जांबाज जवानों की इस संयुक्त टुकड़ी ने बॉर्डर पिलर संख्या 151 से लेकर पिलर संख्या 152 के बीच पड़ने वाले घने, नदी-नालों और संवेदनशील जंगली क्षेत्रों में सघन पैदल गश्त (Foot Patrol) की.
- मुख्य उद्देश्य: गश्ती का मुख्य एजेंडा खुली सीमा के रास्ते होने वाले अवैध आवागमन, मानव तस्करी, मादक पदार्थों (गांजा-स्मैक) की स्मगलिंग, जाली नोटों के कारोबार और अन्य राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की रोकथाम के लिए दोनों ओर के सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत करना था.
तस्करों के खिलाफ बनी संयुक्त रणनीति; रियल-टाइम सूचना का होगा आदान-प्रदान
द्विपक्षीय बैठक में लिए गए अहम फैसले: गश्ती अभियान के समापन पर ‘जीरो लाइन’ के समीप दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारियों के बीच एक अनौपचारिक बॉर्डर को-ऑर्डिनेशन मीटिंग भी हुई. इस बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए कई अहम बिंदुओं पर सहमति जताई.
- क्विक इनफॉर्मेशन शेयरिंग: अधिकारियों ने तय किया कि बॉर्डर पर सक्रिय तस्करों, अपराधियों और असामाजिक तत्वों के किसी भी मूवमेंट या खुफिया इनपुट को दबाने के बजाय दोनों देशों की विंग तुरंत ‘रियल-टाइम इंफॉर्मेशन शेयरिंग’ (सूचना का त्वरित आदान-प्रदान) करेगी, ताकि अपराधी बचकर न भाग सकें.
- विश्वास और तालमेल: एसएसबी और एपीएफ के अधिकारियों ने संयुक्त बयान में कहा कि इस तरह की साझा गश्ती से न केवल सीमावर्ती इलाकों में कानून का राज मजबूत होता है, बल्कि दोनों देशों के ग्राउंड फोर्स के बीच आपसी विश्वास, तालमेल और भाईचारा भी कई गुना बढ़ता है. भविष्य में भी इस प्रकार के साझा ऑपरेशनों को नियमित अंतराल पर जारी रखने की कड़क प्रतिबद्धता दोहराई गई.
स्थानीय सीमावर्ती ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने भी इस संयुक्त गश्ती की पुरजोर सराहना की है. ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा बलों की इस मुस्तैदी से सीमाई इलाकों में शांति, सुरक्षा और सौहार्द का माहौल बना रहता है, जिससे आम जनता खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती है.
