15 अक्टूबर तक खनन पर रोक, फिर भी चेंगा नदी में दौड़ रहे ट्रैक्टर : बंगाल तक पहुंच रहा बालू

चेंगा नदी में अवैध बालू खनन का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा. 15 अक्टूबर तक की रोक के बावजूद नदी से बालू उठाकर पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा है. यह पूरा सप्लाई तंत्र किसकी निगरानी में चल रहा है, यह जांच का विषय है.

किशनगंज : चेंगा नदी में इन दिनों बालू उठाव को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. पश्चिम बंगाल सीमा से सटे कुकुरबाघी पंचायत के नावघाट और हेमालगछ इलाके में नदी के अंदर ट्रैक्टरों की आवाजाही और बालू उठाव की तस्वीरें सामने आने की बात कही जा रही है. खास बात यह है कि 15 अक्टूबर तक नदियों से बालू खनन बंद है. ऐसे में नदी के भीतर ट्रैक्टरों की मौजूदगी ने खनन व्यवस्था और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

चेंगा नदी से उठाता बालू | Prabhat Khabar Network

नावघाट से बिजलीमुनि तक बालू पहुंचाने का आरोप

स्थानीय लोगों की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि नावघाट से चेंगा नदी का बालू ट्रैक्टरों में लोड कर पश्चिम बंगाल के बिजलीमुनि ले जाया जाता है. वहां बालू को कथित तौर पर स्टॉक करने के बाद ट्रकों के माध्यम से आगे बिक्री के लिए भेजे जाने की बात कही जा रही है.

इस तरह नदी से उठने वाले बालू का कथित परिवहन ट्रैक्टर से शुरू होकर स्टॉक स्थल और फिर ट्रकों तक पहुंचने की बात सामने आ रही है.

हेमालगछ से विधाननगर तक भी पहुंचने की चर्चा

इसी तरह हेमालगछ इलाके से भी चेंगा नदी का बालू उठाकर पश्चिम बंगाल के विधाननगर क्षेत्र में बिक्री किए जाने का आरोप है. दो अलग-अलग स्थानों से बालू उठाव और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों तक उसके पहुंचने की चर्चा ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है.

खनन बंद है तो नदी में कैसे पहुंच रहे ट्रैक्टर?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 15 अक्टूबर तक नदी से बालू खनन पर रोक है, तो ट्रैक्टर नदी की धारा तक कैसे पहुंच रहे हैं? क्या बालू उठाव के लिए इनके पास वैध अनुमति है? क्या परिवहन के लिए चालान जारी किया गया है? पश्चिम बंगाल के बिजलीमुनि में बालू के कथित स्टॉक और वहां से ट्रकों में लोड कर बिक्री की अनुमति किस स्तर से मिली है?

यदि बालू उठाव की अनुमति नहीं है, तो नदी से लेकर कथित स्टॉक और बिक्री स्थल तक चल रहे इस पूरे नेटवर्क की निगरानी कौन कर रहा है, यह जांच का विषय है.

जांच से सामने आएगा बालू कारोबार का सच

मामले में अब खनन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई पर नजर है. नावघाट और हेमालगछ में मौके पर जांच के साथ ही बिजलीमुनि और विधाननगर तक बालू के कथित परिवहन की कड़ियों की पड़ताल की जाए तो पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है.

फिलहाल नदी में खड़े ट्रैक्टर कई सवाल छोड़ रहे हैं. खनन बंदी के बावजूद बालू उठाव हो रहा है या इसके पीछे कोई वैध अनुमति है, इसका जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा.

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लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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