फोटो 4 मक्के के बोरियों से लदा ट्रैक्टर-कभी औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर किसान, अब देश के बड़े बाजारों तक पहुंच रही सीमांचल की मक्का प्रतिनिधि, ठाकुरगंज पौआखाली रेलवे स्टेशन पर इन दिनों केवल मक्का की बोरियां ही नहीं लादी जा रही हैं, बल्कि उन किसानों की उम्मीदें भी मालगाड़ी के डिब्बों में सवार होकर सैकड़ों किलोमीटर दूर पंजाब की ओर रवाना हो रही हैं, जो वर्षों से अपनी मेहनत की फसल का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। 15 सितंबर 2025 को उद्घाटित ठाकुरगंज–अररिया रेलखंड पर पहली बार मक्का की पूरी रेक पंजाब के राजपुरा जंक्शन के लिए रवाना की गयी. सीमांचल के लिए यह केवल एक मालगाड़ी नहीं, बल्कि उस सपने की शुरुआत है, जिसके तहत यहां की कृषि उपज को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाने की कल्पना की गई थी. पोवाखाली स्टेशन का दृश्य इन दिनों पूरी तरह बदल गया है. स्टेशन परिसर में मक्का से लदे ट्रैक्टरों और ट्रॉलियों की लंबी कतारें लगी हैं. खेतों से सीधे स्टेशन पहुंच रही फसल को मजदूर तेजी से मालगाड़ी के डिब्बों में भर रहे हैं. हर बोरी के साथ किसानों की उम्मीदें और क्षेत्र के विकास की आकांक्षाएं भी पटरी पर चढ़ती नजर आ रही हैं. जानकारी के अनुसार पौआखाली स्टेशन से लोड की जा रही मक्का की यह पहली रेक सीधे पंजाब के राजपुरा जंक्शन के लिए भेजी जा रही है. दिल्ली–अमृतसर रेलखंड पर स्थित राजपुरा उत्तर भारत के प्रमुख कृषि और औद्योगिक व्यापारिक केंद्रों में गिना जाता है. वहां मक्का की अच्छी मांग रहती है. ऐसे में सीमांचल की उपज का सीधे उस बाजार तक पहुंचना क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. वर्षों से सीमांचल के किसान एक ऐसी व्यवस्था का सामना करते रहे हैं, जहां मेहनत उनकी होती थी, लेकिन मुनाफा अक्सर अन्य लोग उठा लेते थे. मजबूरी में किसानों को अपनी मक्का स्थानीय फैक्ट्रियों या बिचौलियों को औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ती थी. जो किसान बाहर के बाजारों तक पहुंचना चाहते थे, उन्हें भारी भाड़ा खर्च कर ट्रकों का सहारा लेना पड़ता था। कई बार लागत और लाभ का संतुलन ही बिगड़ जाता था. अब पौआखाली स्टेशन से पहली मक्का रेक की लोडिंग ने किसानों को नया भरोसा दिया है. उनका कहना है कि वर्षों से उन्हें मक्का की उपज औने-पौने दाम पर बेचना पड़ता था या भारी भाड़ा खर्च कर ट्रकों से दूरस्थ बाजारों तक भेजना पड़ता था. नए रेलखंड पर मक्का रेक की शुरुआत ने किसानों को पहली बार यह भरोसा दिया है कि उनकी उपज अब सीधे देश के बड़े बाजारों तक पहुंच सकेगी और उन्हें उचित मूल्य मिल सकेगा. स्थानीय व्यापारियों के लिए भी यह अवसर किसी नई सुबह से कम नहीं है. उनका मानना है कि यदि रेलवे नियमित रूप से रेक उपलब्ध कराता रहा, तो मक्का के साथ-साथ जूट, धान, मखाना और अन्य कृषि उत्पादों की भी बड़े पैमाने पर ढुलाई संभव होगी. इससे सीमांचल केवल उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि कृषि व्यापार का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है. स्टेशन पर माल लादने में जुटे मजदूरों के चेहरों पर भी संतोष देखा जा रहा है. जहां पहले स्टेशन पर सन्नाटा पसरा रहता था, वहीं अब गतिविधियों की चहल-पहल ने रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं. मजदूरों को उम्मीद है कि यदि माल ढुलाई का सिलसिला जारी रहा तो उनके घरों में भी आर्थिक स्थिरता आएगी. मक्का की पहली रेक से किसानों, स्थानीय व्यापारियों और मजदूरों के बीच खुशी का माहौल देखा जा रहा है. पूर्व विधायक नौशाद आलम ने इसे सीमांचल के विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है. उन्होंने कहा कि ठाकुरगंज–अररिया रेलखंड वर्षों तक उपेक्षा का शिकार रहा, लेकिन केंद्र सरकार की पहल और रेलवे विस्तार के तहत यह परियोजना पूरी गयी. पौआखाली स्टेशन से मक्का की पहली रेक का रवाना होना इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार की विकास योजनाओं का लाभ अब सीमांचल तक पहुंच रहा है। यह रेलखंड केवल यात्री ट्रेनों के परिचालन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों को बड़े बाजार, व्यापारियों को नए अवसर और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम बनेगा. उन्होंने कहा कि वर्षों से सीमांचल के किसान अपनी उपज के बेहतर मूल्य और बड़े बाजारों तक पहुंच की मांग करते रहे हैं. आज जब यहां की मक्का सीधे पंजाब के व्यापारिक केंद्रों तक पहुंच रही है, तो यह क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है. आने वाले दिनों में इस रेलखंड से माल परिवहन और बढ़ेगा, जिससे पूरे सीमांचल की आर्थिक तस्वीर बदलने में मदद मिलेगी. रेल जानकारों का कहना है कि किसी भी नई रेललाइन की असली परीक्षा केवल यात्री ट्रेनों से नहीं होती, बल्कि यह देखी जाती है कि वह क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को कितना बल देती है. पौआखाली स्टेशन से मक्का की पहली रेक का रवाना होना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. कभी जिस रेलखंड को केवल नई रेलवे लाइन के रूप में देखा जा रहा था, आज वही लाइन सीमांचल के किसानों, व्यापारियों और मजदूरों के लिए उम्मीदों का मार्ग बनती दिखाई दे रही है. पंजाब के राजपुरा जंक्शन की ओर बढ़ती यह मक्का रेक केवल माल नहीं ढो रही, बल्कि अपने साथ उस विश्वास को भी लेकर जा रही है कि सीमांचल की मेहनत अब देश के बड़े बाजारों तक अपनी पहचान बनाने लगी है.
पटरी पर दौड़ी उम्मीदों की फसल: पौआखाली से पंजाब के लिए रवाना हुई मक्का की पहली रेक
रेलखंड केवल यात्री ट्रेनों के परिचालन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों को बड़े बाजार, व्यापारियों को नए अवसर और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम बनेगा.
