किशनगंज : अखंड सुहाग और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से मनाया जाने वाला हरितालिका तीज पर्व इस वर्ष सोमवार, 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा. पर्व को लेकर किशनगंज जिले में सुहागिन महिलाओं में खासा उत्साह है. महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना कर पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करेंगी.
तीज को लेकर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक तैयारियां तेज हो गयी हैं. बाजारों में भी पर्व की रौनक दिखाई देने लगी है.
सुबह 6:05 से 7:06 बजे तक पूजन का शुभ मुहूर्त
पुरोहित घनश्याम झा के अनुसार, इस बार हरितालिका तीज पूजन के लिए कई शुभ समय रहेंगे. प्रातःकाल में पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक बताया गया है.
वहीं, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:32 बजे से 5:19 बजे तक रहेगा. इस दौरान स्नान-ध्यान के बाद व्रत का संकल्प लिया जा सकता है. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक रहेगा.
शाम में पूजा करने वाली महिलाएं गोधूलि बेला में भी पूजन कर सकती हैं. सूर्यास्त शाम 6:28 बजे के बाद गोधूलि बेला का समय रहेगा.
चूड़ी, सिंदूर से साड़ी और पूजा सामग्री तक की खरीदारी
तीज पर्व नजदीक आते ही किशनगंज के बाजारों में रौनक बढ़ गयी है. श्रृंगार और कपड़ों की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ दिखाई दे रही है.
चूड़ी, आलता, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, कंघी, शीशा, काजल, कुमकुम, सुहाग पूड़ा, साड़ी और पूजा सामग्री की खरीदारी तेज हो गयी है. दुकानदारों के अनुसार इस बार हरे और लाल रंग की साड़ियों की मांग अधिक है.
महिलाओं में पर्व को लेकर खास उत्साह
कई महिलाओं का कहना है कि उन्हें पूरे साल हरितालिका तीज का इंतजार रहता है. उनके लिए यह केवल व्रत नहीं, बल्कि श्रद्धा, प्रेम और समर्पण का पर्व है.
मान्यता के अनुसार सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं.
शिव-पार्वती के मिलन से जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार हरितालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ा पर्व है. मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया. इसी मान्यता के कारण तीज को शिव-पार्वती के मिलन और दांपत्य सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है.
मिट्टी से बनायी जाती है शिव-पार्वती की प्रतिमा
पुरोहितों के अनुसार हरितालिका तीज के पूजन में काली गीली मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाने की परंपरा है. पूजन सामग्री में बेलपत्र, जनेऊ, धूप-अगरबत्ती, कपूर, कलश, अबीर, चंदन, तेल, घी, दही, शहद, दूध, पंचामृत और पीले वस्त्र आदि का विशेष महत्व बताया गया है.
महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर रात्रि में भजन-कीर्तन और कथा श्रवण करती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा और निष्ठा से व्रत करने से अखंड सौभाग्य की कामना पूरी होती है.
