गलगलिया (किशनगंज) से विवेक चौधरी की रिपोर्ट
Anti Drug Awareness Rally: बिहार के सीमावर्ती और सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील किशनगंज जिले के गलगलिया इलाके में मंगलवार को एक बेहद प्रेरणादायक और विहंगम दृश्य देखने को मिला. युवा पीढ़ी को खोखला कर रहे मादक पदार्थों और नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ समाज को जगाने के लिए बच्चों ने एक कड़ा मोर्चा संभाला. जिन मासूम हाथों में अमूमन स्कूल की किताबें और कलम होनी चाहिए थीं, उन नन्हे हाथों ने आज नशे के खिलाफ कड़े नारों वाली तख्तियां (बैनर) थाम रखी थीं. गलगलिया थाना पुलिस और 41वीं बटालियन एसएसबी (SSB) भातगांव के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस ‘विशाल नशा मुक्ति जागरूकता रैली’ ने पूरे सीमावर्ती क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया, जिसमें जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और आम नागरिकों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा.
दरभंगिया टोला से सहनी टोला तक गूंजे नारे; जनआंदोलन में बदला अभियान
- इन बस्तियों को किया कवर: यह विशाल जागरूकता मार्च गलगलिया के विभिन्न संवेदनशील और घनी आबादी वाले मोहल्लों से होकर गुजरा, जिनमें मुख्य रूप से दरभंगिया टोला, लकड़ी डिपो, घोपपाड़ा और सहनी टोला शामिल हैं.
- गूंजा बचपन का संकल्प: रैली में शामिल विभिन्न सरकारी व निजी स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने पूरे रास्ते “नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो”, “नशे को दूर भगाना है, सुंदर समाज बनाना है” जैसे बुलंद नारों से पूरे प्रमंडल को गुंजायमान कर दिया. बच्चों के इस कड़े तेवर को देखकर सड़कों और बाजारों में मौजूद लोगों की निगाहें ठहर गईं.
सीमावर्ती इलाकों में स्मगलिंग और नशे की कड़क चुनौती; SSB ने जताई चिंता
जागरूकता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच: भारत-नेपाल बॉर्डर पर तैनात 41वीं बटालियन भातगांव के एसएसबी (SSB) अधिकारियों ने वैश्विक और स्थानीय स्तर पर बढ़ रहे मादक पदार्थों के संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की. अधिकारियों ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में युवाओं को दिग्भ्रमित कर नशे की गर्त में धकेलने की तस्करों की साजिशों को केवल कड़क पुलिसिंग से नहीं, बल्कि समाज की मुस्तैद जागरूकता और सामूहिक इच्छाशक्ति से ही पूरी तरह कुचला जा सकता है.
“नशा पूरे परिवार को बर्बादी के अंधेरे में धकेल देता है”: थानाध्यक्ष राकेश कुमार
रैली का नेतृत्व कर रहे गलगलिया के वर्तमान थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने सभा को संबोधित करते हुए कड़े शब्दों में कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति के स्वास्थ्य को नष्ट नहीं करता, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से पूरे हंसते-खेलते परिवार को बर्बादी के घने अंधेरे में धकेल देता है. आज के समय में कई घर उजड़ रहे हैं और युवाओं का कीमती भविष्य इस लत के कारण समय से पहले समाप्त हो रहा है.
थानाध्यक्ष ने स्पष्ट लहजे में कहा, “नशे के सौदागरों और अपराधियों के खिलाफ पुलिसिया और कानूनी कार्रवाई अपनी जगह कड़ाई से जारी है, लेकिन इस सामाजिक बुराई पर असली और स्थाई जीत तब मिलेगी जब हर मां-बाप और समाज का हर नागरिक स्वयं सजग होकर इसके खिलाफ उठ खड़ा होगा.”
नशा मुक्ति का सामूहिक संकल्प:
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी पुलिस पदाधिकारियों, एसएसबी के वीर जवानों, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने एक सुर में हाथ उठाकर और कसम खाकर आजीवन किसी भी प्रकार के मादक पदार्थों का सेवन न करने तथा अपने आस-पास के माहौल को ‘ड्रग फ्री’ (नशा मुक्त) बनाने का कड़ा संकल्प लिया. गलगलिया की सड़कों पर उमड़ी यह भीड़ केवल एक सरकारी औपचारिकता या कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि नशे के सौदागरों को समाज की एक सीधी और खुली चेतावनी थी.
