रीगल रिसोर्सेस गलगलिया फैक्ट्री में मक्के का भाव 6 दिनों में 30 पैसे टूटा, खरीद के कड़े मानकों से किसानों की बढ़ी चिंता

Galgalia Maize: ठाकुरगंज और आसपास के मक्का उत्पादक किसानों के लिए दोहरी मुसीबत सामने आई है, गलगलिया स्थित मक्का फैक्ट्री रीगल रिसोर्सेस लिमिटेड में मक्के के भाव में लगातार गिरावट आ रही है, वहीं कंपनी ने नमी (मॉइस्चर) और गुणवत्ता को लेकर खरीद मानकों को बेहद सख्त कर दिया है.

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Galgalia Maize: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड सहित पूरे सीमांचल क्षेत्र के मक्का किसानों के लिए गलगलिया स्थित प्रमुख मक्का खरीद केंद्र ‘रीगल रिसोर्सेस लिमिटेड’ से एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक खबर है, फैक्ट्री में मक्के की सरकारी व व्यापारिक कीमतों में लगातार मंदी देखी जा रही है, जिससे किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है. इस आर्थिक नुकसान के बीच कंपनी प्रबंधन ने मक्का खरीद की गुणवत्ता जांच के नियमों को और अधिक कड़ा कर दिया है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्र के हजारों किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं.

छह दिनों में 30 पैसे प्रति किलो टूटा भाव, देखें गिरावट का ग्राफ

रीगल रिसोर्सेस लिमिटेड द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह दिनों के भीतर मक्के के दामों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है:

  • मंगलवार का भाव: मक्का 19.20 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर खरीदा जा रहा था.
  • शुक्रवार का भाव: दाम घटकर 19.10 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए.
  • शनिवार का भाव: मक्के की कीमत और टूटकर 19 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई.
  • 31 मई (रविवार) का नया भाव: कंपनी द्वारा आज के लिए 18.90 रुपये प्रति किलोग्राम की नई और न्यूनतम दर जारी की गई है, इस प्रकार महज छह दिनों के भीतर किसानों को प्रति किलोग्राम पर 30 पैसे (यानी 30 रुपये प्रति क्विंटल) का सीधा नुकसान उठाना पड़ रहा है.

बीडीडीआई (BDDI) और नमी को लेकर सख्त नियम, सीधे रिजेक्ट होगी गाड़ी

गुणवत्ता मानक और पेनाल्टी: गिरते भावों के बीच कंपनी ने सख्त चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि खरीद मानकों में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा, 31 मई से लागू नए नियमों के तहत खरीद प्रक्रिया को निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा गया है:

  • BDDI मानक: यदि किसी भी मालवाहक गाड़ी में बीडीडीआई (BDDI) 24 प्रतिशत से अधिक पाया जाता है, तो उसे फैक्ट्री में अनलोड नहीं किया जाएगा और वाहन को सीधे रिजेक्ट कर दिया जाएगा, यदि गाड़ी के कुछ ही बोरों में यह मात्रा अधिक मिलती है, तो उन्हें अलग से ‘रिजेक्टेड’ श्रेणी में डालकर खाली कराया जाएगा.
  • मॉइस्चर (नमी) के नियम:
    • 15 प्रतिशत तक नमी: इस सीमा तक का मक्का पूरी तरह पास (स्वीकृत) माना जाएगा.
    • 16 प्रतिशत तक नमी: इसे क्लेम (कटौती/शर्तों) के साथ स्वीकार किया जा सकता है.
    • 16 प्रतिशत से अधिक नमी: मक्के में 16% से ज्यादा मॉइस्चर पाए जाने पर पूरे माल को सीधे तौर पर रिजेक्ट (अस्वीकार) कर दिया जाएगा.

सीमांचल के हजारों किसानों की आय पर पड़ेगा सीधा असर

गलगलिया स्थित यह फैक्ट्री ठाकुरगंज, गलगलिया, पौआखाली, छत्तरगाछ, टेढ़ागाछ और आसपास के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों किसानों के लिए मक्का बिक्री का सबसे प्रमुख और बड़ा केंद्र मानी जाती है. स्थानीय किसानों का कहना है कि एक तरफ खाद, बीज, पटवन और लेबर चार्ज बढ़ने से खेती की लागत लगातार आसमान छू रही है, वहीं दूसरी तरफ बाजार में मक्के का भाव उल्टी दिशा में जा रहा है, अब इन कड़े मानकों के कारण माल रिजेक्ट होने की आशंका से किसानों को आर्थिक बर्बादी का डर सता रहा है.

कंपनी की अपील:

बढ़ते विवाद और आशंकाओं के बीच कंपनी प्रबंधन ने किसानों और स्थानीय व्यापारियों से विशेष अपील की है कि वे अपनी उपज को ट्रैक्टर या ट्रकों के जरिए सीधे खरीद केंद्रों पर भेजने से पहले अपने स्तर पर उसकी नमी (Moisture) और बीडीडीआई की गुणवत्ता की जांच अनिवार्य रूप से करा लें, ताकि फैक्ट्री पहुंचने पर माल रिजेक्ट होने की अप्रिय स्थिति और परिवहन के अतिरिक्त खर्च से बचा जा सके, फिलहाल, क्षेत्र के तमाम किसानों की निगाहें आने वाले दिनों में मक्के के बाजार भाव और कंपनी की आगामी रुख पर टिकी हुई हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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