किशनगंज/गलगलिया से विवेक चौधरी की रिपोर्ट
Galgalia Border: किशनगंज जिले के गलगलिया से सटीक सटी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सक्रिय मानव तस्करी और जाली दस्तावेजों के सहारे विदेशी नागरिकों की अवैध आवाजाही कराने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों को बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है. सीमा पर स्थित मुख्य पानीटंकी बॉर्डर चेकपोस्ट पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और आव्रजन (इमिग्रेशन) विभाग ने फर्जी इमिग्रेशन एग्जिट स्टैम्प के सहारे भारत की सीमा से बाहर निकलने की कोशिश कर रही दो थाईलैंड की महिला नागरिकों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया है. इस चौंकाने वाली कार्रवाई ने सीमा पार संचालित एक बेहद संगठित और शातिर ‘फर्जी इमिग्रेशन सिंडिकेट’ की परतें खोलकर रख दी हैं.
बीआईटी की सघन जांच में फंसी स्विफ्ट कार, संदिग्ध कूरियर एजेंट फरार
मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 41वीं वाहिनी एसएसबी रानीडांगा की बॉर्डर इंटरैक्शन टीम (BIT) ने कमांडेंट विकास कुमार के कुशल नेतृत्व में गुरुवार को न्यू ब्रिज, पानीटंकी बॉर्डर चेकपोस्ट पर नियमित लेकिन बेहद कड़ा सघन जांच अभियान चलाया था.
- कागजातों की जांच: इसी दौरान पश्चिम बंगाल और बिहार सीमा के समन्वय से नेपाल की ओर जा रही एक संदिग्ध सफेद स्विफ्ट कार को सुरक्षाकर्मियों ने रोक लिया और उसमें सवार यात्रियों के पहचान पत्रों व यात्रा दस्तावेजों की जांच शुरू की.
- चाय की चुस्की के बीच शक: जांच के दौरान कार में मौजूद दोनों विदेशी महिलाओं से रूटीन एग्जिट (निकासी) प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया, जिसके तहत उनके पासपोर्ट सत्यापन के लिए वहां तैनात इमिग्रेशन अधिकारियों को सौंपे गए. दस्तावेजों की स्क्रूटनी के दौरान ही महिलाओं के साथ मौजूद एक संदिग्ध कूरियर एजेंट (बिचौलिया) को आभास हो गया कि वह पकड़ा जाएगा. अधिकारियों का शक बढ़ते देख वह मौका पाकर चेकपोस्ट से चकमा देकर फरार हो गया. हालांकि, भाग रहे एजेंट की गतिविधियां और प्रयुक्त वाहन की तस्वीरें चेकपोस्ट पर लगे हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई हैं.
पासपोर्ट पर लगे एग्जिट स्टैम्प निकले पूरी तरह जाली
सत्यापन में बड़ा खुलासा: इमिग्रेशन अधिकारियों ने जब दोनों विदेशी महिलाओं के पासपोर्ट की बारकोड स्कैनिंग और केंद्रीय आव्रजन डेटाबेस से मिलान किया, तो एक बेहद गंभीर मामला सामने आया. जांच में पाया गया कि दोनों महिलाओं के पासपोर्ट पर लगे भारत से बाहर जाने के एग्जिट स्टैम्प (Seal) पूरी तरह फर्जी और लोकल स्तर पर निर्मित थे. केंद्रीय इमिग्रेशन कार्यालय द्वारा इन नंबरों पर कोई भी वैध एग्जिट अनुमति या क्लीयरेंस जारी ही नहीं की गई थी.
मामला देश की आंतरिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन से जुड़ा होने के कारण एसएसबी, केंद्रीय खुफिया ब्यूरो (IB), इमिग्रेशन और स्थानीय गलगलिया व सीमावर्ती पुलिस की संयुक्त टीम ने बंद कमरे में कड़ाई से पूछताछ शुरू की.
थाईलैंड की रहने वाली हैं दोनों महिलाएं, बड़े रैकेट की आशंका
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई सघन पूछताछ के बाद गिरफ्तार विदेशी महिलाओं की आधिकारिक पहचान सार्वजनिक की गई है, जो इस प्रकार है:
- पिमचानोक केटला (उम्र 43 वर्ष, निवासी- थाईलैंड)
- चिंतरा बुद्धाफोंग (उम्र 38 वर्ष, निवासी- थाईलैंड)
प्रारंभिक पूछताछ में दोनों महिलाओं ने स्वीकार किया है कि वे दिल्ली और कोलकाता के रास्ते इस सीमावर्ती इलाके में पहुंची थीं और उन्हें फर्जी सील और दस्तावेज तैयार कर सीमा पार कराने के लिए एक संगठित गिरोह ने मोटी रकम के बदले मदद का भरोसा दिया था.
सीमा सुरक्षा से जुड़े उच्च पदस्थ अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल जाली मोहर लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित मानव तस्करी (Human Trafficking), ड्रग्स सिंडिकेट या अवैध आव्रजन रैकेट से गहरे जुड़े हो सकते हैं. केंद्रीय जांच एजेंसियां अब फरार कूरियर एजेंट के मोबाइल लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गई हैं. भारत-नेपाल सीमा पर इस बड़ी मुस्तैदी ने साबित कर दिया है कि सुरक्षा बलों की पैनी नजर से बच पाना नामुमकिन है.
