टेढ़ागाछ और दिघलबैंक में फ्री आई कैंप, 195 ग्रामीणों की हुई जांच

Azad India Foundation: किशनगंज जिले के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने के लिए टेढ़ागाछ और दिघलबैंक प्रखंडों में चार दिवसीय विशेष निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया. इस महाभियान के तहत 195 लोगों की आंखों की मुफ़्त जांच की गई, जिसमें मोतियाबिंद से पीड़ित पाए गए 83 मरीजों को बेहतर इलाज के लिए अस्पताल रेफर किया गया है.

किशनगंज से गौरव कुमार की रिपोर्ट

Azad India Foundation: जिला मुख्यालय के सीमावर्ती और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को आम जनता तक सीधे पहुंचाने के लिए सामाजिक संस्थाओं ने एक बड़ी पहल की है. किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ एवं दिघलबैंक प्रखंड के विभिन्न संवेदनशील और दूर-दराज के क्षेत्रों में ‘निःशुल्क नेत्र जांच शिविर’ (Free Eye Check-up Camp) का सफ़ल आयोजन किया गया. इस विशेष स्वास्थ्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले 40 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और महिलाओं में नेत्र रोगों की समय रहते पहचान करना और अंधापन नियंत्रण को लेकर जागरूकता बढ़ाना था. चार दिनों तक चले इन अलग-अलग कैंपों में स्थानीय ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर अपनी आंखों की निशुल्क जांच कराई और परामर्श प्राप्त किया.

चार स्कूलों में अलग-अलग तिथियों पर सजे काउंटर; देखें पूरा शेड्यूल

ग्रामीणों को उनके घर के समीप ही विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा मुहैया कराने के लिए इस कैंप को निम्नलिखित रूप से अलग-अलग पंचायतों में संचालित किया गया:

  • 30 और 31 मई का अभियान: इस विशेष स्वास्थ्य मुहिम की शुरुआत 30 मई को हाटगांव मिडिल स्कूल से की गई. इसके अगले दिन यानी 31 मई को खनियाबाद मिडिल स्कूल में शिविर लगाकर सैकड़ों लोगों के विजन की जांच की गई.
  • 02 और 03 जून का रूट: जून महीने की शुरुआत में इस अभियान को आगे बढ़ाते हुए 2 जून को मटियारी मिडिल स्कूल और अंत में 3 जून को दिघलबैंक प्रखंड के असद मॉडल स्कूल, बेतबड़ी में अंतिम जांच शिविर का आयोजन किया गया.

92 लोगों में मिला विजन डिफेक्ट, 83 मोतियाबिंद मरीज चिन्हित

जांच के आधिकारिक आंकड़े: इन चारों शिविरों के समापन के बाद आयोजकों द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 195 ग्रामीणों की आंखों की मुफ़्त और गहन तकनीकी जांच की गई. जांच के दौरान चिकित्सा दल ने पाया कि 83 लोगों के फेज़ में मोतियाबिंद (Cataract) के शुरुआती और गंभीर लक्षण मौजूद हैं, जिन्हें सर्जरी व आगे के मुफ़्त उपचार हेतु अनुमंडलीय व जिला अस्पताल रेफर किया गया है. इसके अतिरिक्त, 92 लोगों में दृष्टि दोष (विजन संबंधी समस्याएं) पाए जाने पर उन्हें चश्मे का नंबर व दवाइयां दी गईं, जबकि 17 अन्य लोगों को आंखों के इंफेक्शन और एलर्जी के लिए आवश्यक परामर्श व आई ड्रॉप्स उपलब्ध कराए गए.

ऑप्टोमेट्रिस्ट ज़ोया नाज़ और आज़ाद इंडिया फ़ाउंडेशन का संयुक्त प्रयास

इस पूरे परोपकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम का सफ़ल संचालन विख्यात ऑप्टोमेट्रिस्ट ज़ोया नाज़ (एसजीटी यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम, हरियाणा) और किशनगंज की सुप्रसिद्ध सामाजिक संस्था ‘आजाद इंडिया फाउंडेशन’ (Azad India Foundation) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया. शिविर के समापन पर संस्था के पदाधिकारियों और चिकित्सा दल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना और संसाधनों के अभाव के कारण लोग अक्सर मोतियाबिंद और धुंधलापन जैसी गंभीर समस्याओं को बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में स्थाई अंधेपन का कारण बन जाता है. डॉक्टरों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे आंखों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें और समय-समय पर अपने विजन की जांच कराते रहें, ताकि किसी भी गंभीर नेत्र रोग को शुरुआती स्टेज में ही नियंत्रित किया जा सके.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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