पौआखाली से रणविजय की रिपोर्ट
Former Minister Naushad Alam: एक तरफ सरकार जहां सूबे में चमचमाती सड़कों का दावा करती है और सुदूर ग्रामीण इलाकों को मुख्य मार्गों से जोड़ने का दम भरती है, वहीं दूसरी तरफ किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड में जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. हद तो तब हो जाती है जब वीआईपी (VIP) और रसूखदार नेताओं के अपने गांव की सड़कें भी विकास के दावों की पोल खोल रही हों. ताजा मामला एनएच 327ई गंभीरगढ़ चौक से बिहार सरकार के पूर्व मंत्री नौशाद आलम के पैतृक गांव दुराघाटी को जोड़ने वाले मुख्य संपर्क पथ का है, जहां ग्रामीण नारकीय जीवन जीने को विवश हैं.
सड़क है या तालाब, पहचानना मुश्किल, पैदल चलना भी हुआ दूभर
इस मुख्य मार्ग की जर्जर स्थिति और राहगीरों की दिक्कतों का विस्तृत विवरण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से सामने आया है:
- गड्ढों में तब्दील हुआ मार्ग: हल्की सी बारिश होते ही इस मुख्य सड़क की सूरत किसी जलमग्न तालाब जैसी हो जाती है, सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों में बारिश का पानी इस कदर लबालब जमा हो जाता है कि राहगीरों और वाहन चालकों को यह अंदाजा ही नहीं मिलता कि गड्ढा कहाँ है और सुरक्षित सड़क कहाँ है.
- आवागमन ठप होने की कगार पर: दुराघाटी और अंडाबारी जैसे घनी आबादी वाले गांवों को सीधे नेशनल हाईवे 327ई से जोड़ने वाली इस बेहद महत्वपूर्ण सड़क पर अब लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो चुका है, इस नारकीय रास्ते के कारण स्कूली बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है.
क्षतिग्रस्त कलभर्ट दे रहा है बड़े हादसे को दावत
संपर्क टूटने का खतरा: ग्रामीणों की मुसीबत सिर्फ सड़क के जानलेवा गड्ढों तक ही सीमित नहीं है, गांव के ही नजदीक और पंचायत सरकार भवन के पास स्थित एक कलभर्ट (पुलिया) भी लंबे समय से अत्यंत क्षतिग्रस्त अवस्था में है. पानी के भारी बहाव और समय पर मरम्मत न होने के कारण यह कलभर्ट कभी भी पूरी तरह जमींदोज हो सकता है, जिससे कई गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट जाएगा.
पूर्व मंत्री का क्षेत्र, फिर भी व्यवस्था मौन, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है कि जिस क्षेत्र ने बिहार सरकार को मंत्री दिया, आज उसी क्षेत्र की मुख्य जीवन रेखा दम तोड़ रही है:
- रोजाना हो रही दुर्घटनाएं: हर दिन इस जर्जर और फिसलन भरी सड़क से गुजरने वाले मोटरसाइकिल सवार और ई-रिक्शा चालक असंतुलित होकर गिर रहे हैं और दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं.
- जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी: वीआईपी क्षेत्र होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर जनसमस्या को लेकर पूरी तरह मौन साधे बैठा है, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है.
मानसून से पहले सड़क मरम्मत और नए कलभर्ट के निर्माण की मांग
प्रशासनिक संज्ञान की अपील:
दुराघाटी और आसपास के ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जिला प्रशासन, ग्रामीण कार्य विभाग (RWD) और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से इस दिशा में अविलंब संज्ञान लेने की पुरजोर मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि मानसून की पूर्ण शुरुआत होने से पहले इस मुख्य संपर्क पथ की विशेष मरम्मत कराई जाए, साथ ही क्षतिग्रस्त हो चुके कलभर्ट का नए सिरे से सुदृढ़ निर्माण कराया जाए, ताकि क्षेत्र की बड़ी आबादी को इस रोजाना के नरक और संभावित जानलेवा खतरे से परमानेंट मुक्ति मिल सके.
