KISHANGANJ : देर से विद्यालय पहुंचने वाले शिक्षकों से मांगा गया स्पष्टीकरण
जिले के सरकारी विद्यालयों में समय पालन सुनिश्चित करने को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है.
ठाकुरगंज ( किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट :
जिले के सरकारी विद्यालयों में समय पालन सुनिश्चित करने को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है. जिला शिक्षा पदाधिकारी, किशनगंज द्वारा जारी पत्रांक BEP-731 दिनांक 11 मई 2026 के तहत ई-शिक्षाकोष पोर्टल की रिपोर्ट के आधार पर देर से विद्यालय पहुंचने वाले 170 से अधिक शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. जारी आदेश में सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि निर्धारित समय सुबह 6:30 बजे के बाद विद्यालय पहुंचने वाले शिक्षकों से दो दिनों के भीतर लिखित जवाब प्राप्त करें. विभाग ने स्पष्ट किया है कि समय पालन में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा तथा संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में वेतन कटौती सहित विभागीय कार्रवाई की जा सकती है.
पोर्टल पर दर्ज इन-टाइम के आधार पर शिक्षकों की सूची तैयार
विभाग द्वारा जारी सूची में 4 मई से 11 मई 2026 तक के उपस्थिति लॉग का उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट में 4 मई, 5 मई, 6 मई, 7 मई, 8 मई, 9 मई और 11 मई को ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज इन-टाइम के आधार पर शिक्षकों की सूची तैयार की गई है. इसमें पोठिया, ठाकुरगंज, बहादुरगंज, दिघलबैंक और कोचाधामन प्रखंड के शिक्षकों के नाम शामिल हैं. शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए शिक्षकों की नियमित उपस्थिति आवश्यक है. इसी उद्देश्य से ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से उपस्थिति की निगरानी की जा रही है.
शिक्षकों ने भी उठाये सवाल
हालांकि विभागीय कार्रवाई के बीच शिक्षकों ने भी कई सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. शिक्षकों का कहना है कि जिन दिनों की रिपोर्ट के आधार पर जवाब तलब किया गया है, उन दिनों जिले में लगातार बारिश, खराब सड़क और कमजोर इंटरनेट नेटवर्क की समस्या बनी हुई थी. कई विद्यालयों में समय पर पहुंचने के बावजूद सर्वर और नेटवर्क समस्या के कारण पोर्टल पर उपस्थिति देर से दर्ज हुई. शिक्षकों का यह भी कहना है कि विभाग केवल “इन टाइम” को आधार बना रहा है. जबकि विद्यालय समय समाप्त होने के बाद किए जाने वाले अतिरिक्त कार्य और “आउट टाइम” की कभी समीक्षा नहीं होती. ऐसे में केवल डिजिटल लॉगिन के आधार पर कार्रवाई को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं.