बिहार के शिक्षा विभाग ने राज्य के सरकारी शिक्षकों की स्थानांतरण (तबादला) प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है. इसके तहत अब स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया केवल ई-शिक्षाकोष पोर्टल (e-Shikshakosh Portal) के जरिए ऑनलाइन संचालित की जाएगी. विभाग ने सख्त हिदायत दी है कि ऑफलाइन या किसी अन्य माध्यम से भेजे गए आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा.
ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर ऑनलाइन पूरी होगी प्रक्रिया
शिक्षा विभाग के नए निर्देशों के अनुसार, तबादले से जुड़ी हर गतिविधि डिजिटलाइज्ड रहेगी:
- पारदर्शिता पर जोर: आवेदन जमा करने, पसंदीदा स्कूलों के विकल्प चयन से लेकर अंतिम विद्यालय आवंटन (School Allocation) तक की पूरी प्रक्रिया पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होगी. इससे पैरवी और अनियमितताओं पर पूरी तरह अंकुश लगेगा.
शिक्षकों को राहत: 5 साल की बाध्यता खत्म, जानें योग्यता
नई एसओपी में शिक्षकों के हित में कई बड़े बदलाव किए गए हैं:
- 5 वर्ष की सेवा शर्त शिथिल: पहली बार स्थानांतरण प्रक्रिया में भाग लेने वाले शिक्षकों के लिए 5 साल की न्यूनतम सेवा अवधि की शर्त को एक बार के लिए हटा दिया गया है.
- पात्रता की आधार तिथि: सेवा अवधि और पात्रता की गणना 31 मार्च को कट-ऑफ डेट मानकर की जाएगी.
- प्रोबेशन पीरियड वाले बाहर: वर्तमान में परिवीक्षा (Probation Period) में कार्यरत शिक्षक, प्रधान शिक्षक और प्रधानाध्यापक इस प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकेंगे.
- पिछले 2 साल में तबादला पाने वाले भी योग्य: पिछले दो वर्षों के भीतर स्थानांतरित हुए शिक्षक भी इस बार पुनः आवेदन करने के पात्र होंगे.
कैसे पूरी होगी चरणबद्ध स्थानांतरण प्रक्रिया?
| चरण | प्रक्रिया का विवरण |
| पहला चरण | विभाग ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर जिलेवार अधिशेष (Surplus) और शिक्षक-अभाव वाले स्कूलों की सूची जारी करेगा. |
| दूसरा चरण | अधिशेष (सरप्लस) शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा. |
| तीसरा चरण | शिक्षकों को अधिकतम 30 विद्यालयों का विकल्प चुनने का अवसर दिया जाएगा. |
| चौथा चरण | एक ही स्कूल के लिए एक से अधिक आवेदन आने पर अंक आधारित वरीयता प्रणाली (Points Preference System) से आवंटन होगा. |
| अंतिम चरण | पारस्परिक (Mutual) और अंत में सामान्य स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. |
समयबद्ध और निष्पक्ष होगी व्यवस्था
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से शिक्षकों को दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी. पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, त्रुटिरहित और समयबद्ध तरीके से संपन्न होगी, जिससे राज्य के लाखों शिक्षकों को सहूलियत मिलेगी.
