सीमांचल की खनिज अर्थव्यवस्था पर डिजिटल शिकंजा
सीमांचल के खनिज कारोबार में 10 जून से बड़ा बदलाव होने जा रहा है. पश्चिम बंगाल से बिहार आने वाली गिट्टी, पत्थर और अन्य लघु खनिजों की हर खेप अब सरकार की डिजिटल निगरानी में होगी.
किशनगंज के प्रतिनिधि के अनुसार
सीमांचल के खनिज कारोबार में 10 जून से बड़ा बदलाव होने जा रहा है. पश्चिम बंगाल से बिहार आने वाली गिट्टी, पत्थर और अन्य लघु खनिजों की हर खेप अब सरकार की डिजिटल निगरानी में होगी. खान एवं भूतत्व विभाग ने इंटर स्टेट ट्रांजिट पास को अनिवार्य कर दिया है. इसके लागू होते ही बिना ऑनलाइन अनुमति के खनिज लेकर आने वाले वाहनों पर कार्रवाई होगा. यह फैसला ऐसे समय आया है जब सीमांचल के बॉर्डर इलाकों में वर्षों से खनिज परिवहन को लेकर सवाल उठते रहे हैं. किशनगंज, ठाकुरगंज और गलगलिया मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक पश्चिम बंगाल के क्रशर क्षेत्रों से बिहार में प्रवेश करते हैं. निर्माण कार्यों की रीढ़ माने जाने वाले इस कारोबार का आकार करोड़ों नहीं, बल्कि हजारों करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था से जुड़ा माना जाता है. नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक ट्रक का पूरा ब्योरा ऑनलाइन दर्ज होगा. वाहन संख्या, खनिज का स्रोत, मात्रा, गंतव्य और परिवहन चालान की जानकारी सिस्टम में अपलोड करने के बाद ही ट्रांजिट पास जारी किया जाएगा. यानी सरकार के पास यह रिकॉर्ड रहेगा कि कौन सा ट्रक कहां से चला और कहां तक पहुंचा.
ओवरलोडिंग व राजस्व निगरानी पर भी नजर
सीमांचल की सड़कों पर वर्षों से ओवरलोड गिट्टी ट्रकों की आवाजाही चर्चा का विषय रही है. भारी वाहनों के दबाव से सड़कें समय से पहले टूटने और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की शिकायतें भी उठती रही हैं. ऐसे में आईएसटीपी व्यवस्था को केवल एक परमिट सिस्टम नहीं, बल्कि खनिज परिवहन पर निगरानी मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है.
अब असली परीक्षा जमीन पर
हालांकि जानकारों का कहना है कि केवल ऑनलाइन पास जारी कर देने से व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी नहीं बन जाएगी. यदि सीमा क्षेत्रों में वेट चेकिंग, दस्तावेज सत्यापन और नियमित जांच अभियान नहीं चले तो सिस्टम का उद्देश्य अधूरा रह सकता है. वहीं सख्ती से क्रियान्वयन होने पर अवैध परिवहन, गलत विवरण और नियमों के उल्लंघन पर अंकुश लग सकता है.