किशनगंज से रामबाबू की रिपोर्ट
Dighalbank Teacher: बिहार के किशनगंज जिले के दिघलबैंक प्रखंड से एक बेहद भावनात्मक और सम्मान से जुड़ी खबर सामने आई है. क्षेत्र के उत्क्रमित मध्य विद्यालय हाड़ीभिट्ठा में शनिवार को एक गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन किया गया. अवसर था विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक रंजन कुमार सिंह की सेवानिवृत्ति (Retirement) का. अपनी सेवा अवधि को पूर्ण करने के बाद वे आधिकारिक रूप से सेवानिवृत्त हो गए. इस विदाई वेला पर विद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर उनके प्रति अपना सम्मान प्रकट किया और उन्हें एक यादगार विदाई दी.
समस्तीपुर के निवासी हैं रंजन सिंह, 2012 में 34,540 कोटि में दी थी सेवा
प्रधानाध्यापक रंजन कुमार सिंह के शैक्षणिक सफर और व्यक्तिगत जीवन का विवरण निम्नलिखित है:
- मूल निवास स्थान: रंजन कुमार सिंह मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर प्रखंड अंतर्गत बेलसंडी गांव के रहने वाले हैं.
- सेवाकाल का इतिहास: उन्होंने वर्ष 2012 में बिहार सरकार की 34,540 शिक्षक कोटि के अंतर्गत बेसिक शिक्षक पद पर अपना योगदान दिया था. अपने लगभग डेढ़ दशक (14 वर्ष) के लंबे और बेदाग सेवाकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न विद्यालयों में अपनी सेवाएं देकर शिक्षा की अलख जगाई.
- वक्ताओं ने की सराहना: समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने रंजन बाबू की अनुशासित कार्यशैली, समयबद्धता और बच्चों के प्रति उनके वात्सल्य भाव की जमकर सराहना की. शिक्षकों ने कहा कि उनके नेतृत्व में विद्यालय ने शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुशासन के क्षेत्र में अपनी एक अलग विशिष्ट पहचान स्थापित की है.
स्मृति चिन्ह देकर किया गया सम्मानित, छात्र-छात्राएं हुए भावुक
प्रेरणादायी विदाई: विदाई समारोह के दौरान विद्यालय परिवार और स्थानीय ग्रामीणों की ओर से निवर्तमान प्रधानाध्यापक को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह, धार्मिक ग्रंथ तथा पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया.
इस दौरान विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चों ने विदाई गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर अपने प्रिय शिक्षक के प्रति सम्मान व्यक्त किया. कई छात्र-छात्राओं ने रोते हुए कहा कि रंजन सर ने उन्हें केवल पाठ्यपुस्तकों का किताबी ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि समाज में एक अच्छा इंसान बनकर जीवन में आगे बढ़ने के संस्कार भी सिखाए हैं.
विद्यार्थियों की सफलता ही शिक्षक की असली पूंजी: रंजन कुमार सिंह
अपने विदाई संबोधन में रंजन कुमार सिंह काफी भावुक नजर आए. उन्होंने पूरे विद्यालय परिवार और दिघलबैंक की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “शिक्षा सेवा मेरे जीवन का सबसे पावन और महत्वपूर्ण अध्याय रही है. किसी भी शिक्षक के लिए उसके विद्यार्थियों की सफलता और उनका आदर ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी और उपलब्धि होती है.” उन्होंने सहकर्मी शिक्षकों से अपील की कि वे सदैव बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी निष्ठा से समर्पित रहें.
समारोह में ये सम्मानित शिक्षक और अधिकारी रहे मौजूद
इस विदाई समारोह को सफल बनाने और रंजन बाबू के सुखद व दीर्घायु जीवन की कामना करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों सहित शिक्षा जगत से जुड़े कई लोग मौजूद रहे:
- मुख्य अतिथि व अधिकारी: प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी सह प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEA) नरेश कुमार मंडल.
- शिक्षक व गणमान्य: अभिराम कुमार, तेज नारायण सिंह, रामबाबू साह, अहसन जफर माहिर, महेंद्र कुमार हरिजन, उदय शंकर मंडल, मो. मनीरूल हक, बासुदेव रॉय, शिव कुमार, सुखदेव मंडला, राजू कुमार, मो. मुजाहिद, मो. रमेश कुमार, रेखा कुमारी, मो. जियाउल हक, महजबी बेगम, सरफराज आलम, अनवारुल हुसैन सहित भारी संख्या में संकुल के शिक्षक-शिक्षिकाएं और ग्रामीण उपस्थित थे. विदाई के अंतिम क्षणों में सभी की आंखें नम हो गईं.
