लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन की मांग

दिल्ली से पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने के लिए एक वैकल्पिक रेल मार्ग की आवश्यकता पर अक्सर चर्चा होती रहती है

-राजधानी एक्सप्रेस के परिचालन से बदलेगी इलाके की फिजा ठाकुरगंज दिल्ली से पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने के लिए एक वैकल्पिक रेल मार्ग की आवश्यकता पर अक्सर चर्चा होती रहती है, जिसका मुख्य कारण मौजूदा सिलीगुड़ी कॉरिडोर है. इस चिकन नेक की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली से पूर्वोतर भारत को जोड़ने के एक वैकल्पिक रेल मार्ग के निर्माण के बाद से इस अररिया – ठाकुरगंज रेल मार्ग पर लबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन की मांग जोर पकड़ने लगी है. बताते चलें कि चिकन नेक 22 किलोमीटर चौड़ा वह संकरा क्षेत्र है जो मुख्य भूमि भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है. बताते चले किशनगंज शहर जो पूर्वोत्तर को शेष भारत से जोडऩे का महत्वपूर्ण केन्द्र है वहा से बांग्लादेश 20 तो नेपाल 40 किमी दूर है वही सिलीगुड़ी से यह दूरी और घट जाती है. जहां से बंगलादेश 8 तो भूटान 60 और चीन का मोर्चा 150 किलोमीटर दूर है. सिलीगुड़ी कॉरिडोर उत्तर की तरफ से चीन से घिरा है, ट्रेन, सडक़ के जाल से संपन्न यह इलाका चीन के किसी भी संभावित हमले में सैनिक साजो-सामान, रसद की आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है , विशेषज्ञों के अनुसार, यही वह क्षेत्र है जिसे निशाना बनाकर भारत को रणनीतिक रूप से अलग-थलग करने की साजिशें रची जाती हैं. इस बाबत ठाकुरगंज रेल यात्री समिति के संयोजक सिकन्दर पटेल ने बताया की यह प्रस्तावित योजना न केवल यात्री सुविधा के लिहाज से अहम है.

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Author: AWADHESH KUMAR

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