पौआखाली (किशनगंज) से रणविजय की रिपोर्ट
Current Death: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत पौआखाली क्षेत्र की रसिया पंचायत से एक अत्यंत हृदयविदारक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है. यहाँ ईद-उल-अजहा (बकरीद) के पावन पर्व की सुबह जहां पूरा जिला उत्सव के माहौल में डूबा हुआ था, वहीं रसिया पंचायत के वार्ड संख्या 13 स्थित कठारो गांव में करंट लगने से एक होनहार युवक की अकाल मौत हो गई. इस आकस्मिक हादसे के बाद पीड़ित परिवार सहित पूरे गांव में कोहराम मच गया है और त्योहार की खुशियां आंसुओं में तब्दील हो गई हैं.
अहले सुबह हुआ हादसा: अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम
स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, कठारो गांव निवासी मोहम्मद रजीबुद्दीन का 30 वर्षीय पुत्र नाजिर आलम अहले सुबह उठकर ईदगाह जाने की तैयारी कर रहा था.
- इस्त्री करने के दौरान हादसा: त्योहार के विशेष नमाज पर पहनने के लिए नाजिर अपने नए कपड़ों पर बिजली के आयरन से इस्त्री कर रहा था. इसी क्रम में आयरन के कटे तार या आंतरिक तकनीकी खराबी के कारण अचानक उसमें बिजली का तेज करंट प्रवाहित हो गया और नाजिर उसकी भयावह चपेट में आ गया.
- अस्पताल में मृत घोषित: करंट लगते ही नाजिर तड़पते हुए अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ा. घर के भीतर चीख-पुकार सुनकर परिजन और आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर दौड़े. आनन-फानन में अचेत नाजिर को इलाज के लिए सीधे सदर अस्पताल किशनगंज ले जाया गया, लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था. अस्पताल के चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच करते ही नाजिर को ‘ब्रॉट डेड’ (अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत) घोषित कर दिया.
महज एक साल पहले हुई थी शादी, पीछे छूट गई 4 महीने की दुधमुंही बच्ची
नाजिर की मौत की आधिकारिक पुष्टि होते ही सदर अस्पताल से लेकर उसके पैतृक गांव कठारो तक परिजनों के चीत्कार से आसमान फट पड़ा. नाजिर की मां, पत्नी और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
गांव के युवा नेता का बयान: घटना की जानकारी देते हुए कठारो गांव के निवासी सह एआईएमआईएम (AIMIM) पार्टी के युवा नेता राहिल अख्तर ने अत्यंत भावुक होकर बताया कि नाजिर एक बेहद मिलनसार और सीधा युवक था. उसकी शादी महज एक वर्ष पूर्व ही बड़े अरमानों के साथ हुई थी. अभी उसकी वैवाहिक जिंदगी ठीक से शुरू भी नहीं हुई थी कि इस काल ने उसे छीन लिया. नाजिर के पीछे उसकी पत्नी और महज चार महीने की एक छोटी सी मासूम दुधमुंही बेटी छूट गई है, जिसे अब यह भी नहीं मालूम कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है.
कठारो गांव में नहीं बची चूल्हा, टल गई कुर्बानी की रस्म
इस दर्दनाक और वीभत्स हादसे के बाद पूरे कठारो गांव सहित आसपास के सीमावर्ती इलाकों में सन्नाटा पसरा हुआ है. जिस घर और टोले से सुबह खुशियों के गीत और ईद की मुबारकबाद गूंजनी थी, वहां से सिर्फ सिसकियों और रोने की आवाजें आ रही हैं.
इस शोक संतप्त माहौल के कारण ग्रामीणों ने एकजुट होकर पर्व की तमाम खुशियां स्थगित कर दीं. घटना के चलते पूरे गांव में बकरीद की पारंपरिक और मुख्य कुर्बानी की रस्म अदायगी भी नहीं की जा सकी. गांव के किसी भी घर में दोपहर तक चूल्हा नहीं जला. इस हृदयविदारक हादसे से हर आंख नम है और पूरा इलाका गहरे सदमे में डूबा हुआ है.