किशनगंज जिले के ठाकुरगंज की सड़कों पर स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सामने आई तस्वीरें व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं. पढ़ने की ललक में मासूम बच्चे रोजाना जान जोखिम में डालकर स्कूल आने-जाने को विवश हैं. सड़कों पर दौड़ रहे ई-रिक्शों (टोटो) में क्षमता से कई गुना अधिक बच्चों को ठूंस-ठूंस कर बैठाया जा रहा है. हद तो यह है कि जिस चालक सीट पर वाहन को नियंत्रित करने के लिए पूरी जगह होनी चाहिए, वहीं बच्चों को अगल-बगल सटाकर बैठाया जा रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा और दर्दनाक सड़क हादसा हो सकता है.
चालक सीट पर बच्चों का कब्जा, वाहन नियंत्रण पर बड़ा खतरा
सड़कों पर दौड़ते स्कूली टोटो में सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं:
- ड्राइविंग सीट पर बच्चों का जमावड़ा: चालक की सीट के आसपास ही दो से तीन बच्चों को बैठाया जा रहा है, जिससे चालक बिल्कुल एक किनारे सिमटकर वाहन चलाने को मजबूर है.
- अचानक ब्रेक पर गिरने का जोखिम: आपात स्थिति में अचानक ब्रेक लगाने, गड्ढों में झटका लगने या तीखे मोड़ पर चालक का संतुलन बिगड़ते ही बच्चों के सीधे सड़क पर गिरने का गंभीर खतरा बना रहता है.
- ई-रिक्शा का खुला डिजाइन: ई-रिक्शा के दोनों तरफ कोई मजबूत सुरक्षा घेरा या दरवाजे नहीं होते, ऐसे में ओवरलोडिंग के कारण किनारे बैठे बच्चे थोड़े से झटके में बाहर गिर सकते हैं.
निगरानी तंत्र पूरी तरह नदारद: अभिभावक भी मजबूर
परिवहन नियमों की अनदेखी और उचित स्कूली वाहनों के अभाव में यह खतरनाक सिलसिला जारी है:
- अभिभावकों की मजबूरी: दूर-दराज के इलाकों से बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचाने के लिए अभिभावक सस्ते विकल्प के रूप में ई-रिक्शा चालकों पर निर्भर हैं.
- प्रशासनिक शिथिलता: स्कूली समय में मुख्य मार्गों और चौराहों पर ओवरलोडिंग की जांच करने वाला कोई नहीं है. न तो यातायात पुलिस और न ही परिवहन विभाग इन डेंजरस राइड्स पर कोई सख्ती दिखा रहा है.
हादसे से पहले चेतने की दरकार
मासूमों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है:
- जांच अभियान की मांग: स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किए बिना स्कूली वाहनों, विशेषकर टोटो और ऑटो की सघन चेकिंग करनी चाहिए.
- क्षमता से अधिक बैठाने पर रोक: चालक सीट पर किसी भी सवारी को बैठाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगे और ओवरलोडिंग करने वाले चालकों के लाइसेंस व वाहन जब्ती की कार्रवाई हो.
