किशनगंज से गौरव की रिपोर्ट
Child Protection: किशनगंज समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) परिसर स्थित महानंदा सभागार में जिला पदाधिकारी (DM) विशाल राज की अध्यक्षता में एक हाई-प्रोफाइल संयुक्त समीक्षा बैठक संपन्न हुई. इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति, बाल कल्याण समिति (CWSC) की त्रैमासिक प्रगति तथा मानव व्यापार विरोधी इकाई (AHTU) के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई. भारत-नेपाल और बंगाल सीमा से सटे होने के कारण किशनगंज में बाल अधिकारों की सुरक्षा और मानव तस्करी पर पूर्ण विराम लगाना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है. इसे देखते हुए डीएम विशाल राज ने बैठक में कई नीतिगत और कड़े फैसले लिए हैं, जो क्षेत्र में बाल संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे.
रेस्क्यू टीम ही कराएगी FIR, तस्करों को तत्काल जेल भेजने की तैयारी
बैठक के दौरान जिला पदाधिकारी ने कानूनी प्रक्रियाओं में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए एक ऐतिहासिक निर्देश जारी किया:
- सीधी जवाबदेही: अब तक बच्चों के रेस्क्यू (विमुक्ति) के बाद एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया में विभागीय तालमेल की कमी के कारण देरी होती थी, जिसका फायदा उठाकर तस्कर फरार हो जाते थे. अब डीएम ने निर्देश दिया है कि जो टीम बच्चों का रेस्क्यू करेगी, वही अनिवार्य रूप से सीधे थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराएगी.
- कौशल विकास: सुरक्षित स्थान (POS/बाल गृह) में रह रहे किशोरों के सर्वांगीण विकास के लिए एक विशेष मासिक कार्ययोजना (Monthly Action Plan) तैयार करने का आदेश दिया गया है. इसके तहत इन बच्चों को नियमित रूप से डिजिटल साक्षरता और अन्य व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण (Skill Training) देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा.
बाल गृहों की सुधरेगी सूरत: गणित-विज्ञान के शिक्षक और साइकेट्रिस्ट होंगे तैनात
बुनियादी सुधारों का आदेश: बच्चों की शिक्षा, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए जिलाधिकारी ने कड़े सुरक्षात्मक और ढांचागत निर्देश जारी किए हैं.
- शिक्षा और पुस्तकें: बाल गृहों में रह रहे बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए शिक्षा विभाग को विशेष रूप से गणित एवं विज्ञान के शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति करने तथा कक्षा 1 से 8 तक की सभी आवश्यक पाठ्यपुस्तकें तुरंत उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया.
- मानसिक स्वास्थ्य: अनाथ या तस्करी से मुक्त कराए गए बच्चों के मानसिक तनाव और ट्रॉमा को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को एक विशेष मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ (Clinical Psychologist/साइकेट्रिस्ट) को नामित करने का निर्देश दिया गया.
- भवन और इंफ्रास्ट्रक्चर: जर्जर हो चुके विभागीय भवनों की अविलंब मरम्मत करने, शुद्ध पेयजल के लिए पानी से आयरन (Iron Filter) की समस्या को दूर करने, मच्छरों के प्रकोप से बचाने के लिए नियमित फॉगिंग और किसी भी अप्रिय हादसे को रोकने के लिए अनिवार्य ‘अग्नि सुरक्षा ऑडिट’ (Fire Safety Audit) कराने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को सौंपी गई है.
पोक्सो (POCSO) के 228 लंबित मामलों की समीक्षा, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का होगा प्रचार
बैठक में बच्चों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों की समीक्षा करते हुए जिले में लंबित पड़े 228 पोक्सो (POCSO) मामलों के त्वरित निष्पादन और कोर्ट ट्रायल में तेजी लाने पर बल दिया गया, ताकि पीड़ित बच्चों को समय पर न्याय मिल सके. डीएम ने प्रखंड स्तर पर गठित बाल संरक्षण समितियों (CPC) को पूरी तरह सक्रिय करने का खाका खींचा. उन्होंने निर्देश दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों की दीवारों पर ‘चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098’ का व्यापक स्तर पर वॉल पेंटिंग के जरिए प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में बच्चे या ग्रामीण सीधे प्रशासन से संपर्क कर सकें.
इस उच्च स्तरीय बैठक में जिला बाल संरक्षण इकाई (ICPS) के सहायक निदेशक आलोक कुमार भारती, डीपीओ (आईसीडीएस), पुलिस उपाधीक्षक (DSP), सिविल सर्जन (CS), श्रम अधीक्षक, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के विंग प्रतिनिधि, बाल संरक्षण पदाधिकारी सहित कई गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के प्रतिनिधि और प्रशासनिक कर्मी मुख्य रूप से उपस्थित रहे.
