मुख्य बातें:
ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Chenga River Chachri Bridge: बिहार के सीमांचल क्षेत्र अंतर्गत किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड से गुरु-शिष्य परंपरा और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है. मानसून की दस्तक के साथ ही उफान पर आई चेंगा नदी ने सखुआ डाली क्षेत्र की बदहाल संपर्क व्यवस्था और सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है. इस साल स्थानीय पंचायत द्वारा नदी पर पारंपरिक चाचड़ी (बांस-बल्लियों का अस्थायी पुल) का निर्माण नहीं कराए जाने के कारण स्कूल के शिक्षकों को जान हथेली पर रखकर नदी की तेज धार और कटीली झाड़ियों व दलदल को पार करना पड़ रहा है.
सोमवार को पूरी तरह ठप रहा आवागमन, मंगलवार को जोखिम उठाकर पहुंचे शिक्षक
बाढ़ की विभीषिका और आवागमन की जमीनी कड़ियां इस प्रकार हैं. स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को चेंगा नदी का जलस्तर अचानक अत्यधिक बढ़ जाने और तेज बहाव होने के कारण उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सखुआ डाली के शिक्षक चाहकर भी विद्यालय परिसर तक नहीं पहुंच सके थे.
हालांकि, मंगलवार को पानी का स्तर मामूली रूप से कम होने पर शिक्षकों ने बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता दी. उन्होंने उफनती नदी की धारा और बाढ़ के पानी से घिरे कीचड़मय रास्तों को पार कर विद्यालय पहुंचकर अपने पठन-पाठन के दायित्व का निर्वहन किया.
तीन महिला शिक्षिकाएं हाथ में चप्पल लेकर पैदल चलने को मजबूर
परेशानी और भौगोलिक विसंगतियों के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:
- शिक्षकों का संघर्ष: मंगलवार को ठाकुरगंज प्रखंड मुख्यालय से आने वाली तीन महिला शिक्षिकाओं और बेहबुलडांगी गांव से आने वाले एक पुरुष शिक्षक को विद्यालय पहुंचने के लिए सबसे पहले चेंगा नदी की ठंडी और तेज धारा को तैरकर/पैदल पार करना पड़ा.
- नारकीय रास्ता: नदी पार करने के बाद भी मुसीबतें कम नहीं हुईं; बाढ़ के पानी के उतरने से रास्ते में कई फीट गहरा कीचड़ और जानलेवा दलदल बन गया है. इसके चलते महिला शिक्षिकाओं को कई किलोमीटर तक हाथ में चप्पल और कपड़े उठाकर पैदल चलने को मजबूर होना पड़ा.
पंचायत की लापरवाही: इस वर्ष क्यों नहीं बनी ‘चाचड़ी’?
“कनकपुर और सखुआ डाली पंचायत के आक्रोशित ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष बरसात का मौसम शुरू होने से ठीक पहले स्थानीय पंचायत के फंड से चेंगा नदी पर एक चाचड़ी (अस्थायी बांस का पुल) का निर्माण अनिवार्य रूप से कराया जाता था. इससे ग्रामीणों, छोटे स्कूली बच्चों, मरीजों और शिक्षकों को आने-जाने में भारी सहूलियत होती थी. लेकिन इस वर्ष मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने और भारी बारिश के बावजूद अब तक नई चाचड़ी का निर्माण क्यों नहीं कराया गया? यह सीधे तौर पर पंचायत प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है.”
Chenga River Chachri Bridge: स्थाई पुल के निर्माण की पुरजोर मांग
शिक्षकों की नदी पार करती यह तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जहां लोग शिक्षा के प्रति उनके इस अद्भुत समर्पण और जज्बे की सराहना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी जन-आक्रोश देखा जा रहा है.
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स्थानीय ग्रामीणों और विद्यालय शिक्षा समिति ने किशनगंज के जिलाधिकारी (DM) और ठाकुरगंज के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) से मांग की है कि तात्कालिक राहत के लिए २४ घंटे के भीतर नदी पर बांस की चाचड़ी बनवाई जाए तथा इस टापू नुमा क्षेत्र को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए नाबार्ड (NABARD) या मुख्यमंत्री सेतु निर्माण योजना के तहत एक स्थाई आरसीसी (RCC) पुल की स्वीकृति दी जाए ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके.
