किशनगंज शहर के मोतीबाग स्थित सैनिक स्कूल सह सरस्वती विद्या मंदिर में वीर सावरकर की जयंती का कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में सर्वप्रथम उपस्थित लोगों ने उनके तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया. एबीवीपी और मेरा युवा भारत प्रकल्प भारत सरकार के तत्वाधान में संगोष्ठी कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस अवसर पर जिला बीस सूत्री उपाध्यक्ष सह वरीय भाजपा नेता सुशांत गोप ने कहा कि स्वराष्ट्र और भारतीयता सनातन परंपरा का प्रेरणा स्रोत वीर सावरकर थे. उन्होंने कहा कि वीर सावरकर (विनायक दामोदर सावरकर) एक महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, इतिहासकार और हिंदुत्व विचारधारा के जनक थे. उनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक में हुआ था. उन्होंने अभिनव भारत जैसे गुप्त क्रांतिकारी संगठन बनाए और 1857 की क्रांति पर प्रामाणिक पुस्तक लिखी. उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने उन्हें 50 साल की कठोर कारावास की सजा देकर अंडमान की सेलुलर जेल भेजा. वहां उन्होंने अमानवीय यातनाएं सहीं. 1924 में रिहाई के बाद (और 1937 तक नजरबंद रहने के दौरान), उन्होंने हिंदू धर्म की कुरीतियों (जैसे छुआछूत और जाति-प्रथा) को मिटाने के लिए लंबा संघर्ष किया. इस अवसर पर प्राचार्य नागेंद्र तिवारी ने कहा कि सावरकर जी के ओजस्वी विचारों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों को बहुत प्रेरित किया. वह भारत की आजादी के प्रमुख और उग्र क्रांतिकारी नायकों में से एक थे. इस अवसर पर भाजपा नगर अध्यक्ष अरविंद मंडल, एबीवीपी विभाग संयोजक अमित, जिला संयोजक दीपक, नेहरू युवा केंद्र के लेखापाल शाहजाह सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे.
सैनिक स्कूल सह सरस्वती विद्या मंदिर में मनायी गयी वीर सावरकर की जयंती
वीर सावरकर (विनायक दामोदर सावरकर) एक महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, इतिहासकार और हिंदुत्व विचारधारा के जनक थे. उनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक में हुआ था.
