AMU Kishanganj Centre: सीमांचल में उच्च शिक्षा के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में देखे जा रहे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय यानी एएमयू के किशनगंज केंद्र का मुद्दा एक बार फिर केंद्रीय स्तर पर पहुंच गया है. एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में पार्टी के बिहार के नेताओं और विधायकों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर एएमयू किशनगंज केंद्र के विकास से जुड़े मुद्दे उठाये.
मुलाकात में बिहार प्रदेश अध्यक्ष सह अमौर विधायक अख्तरुल ईमान समेत पार्टी के विधायक शामिल रहे. प्रतिनिधिमंडल ने एएमयू किशनगंज केंद्र के लंबित मामलों के समाधान के साथ सीमांचल और बिहार से जुड़े अन्य शैक्षणिक एवं जनहित के विषयों पर भी चर्चा की.
किशनगंज में एएमयू केंद्र को लेकर फिर बढ़ी हलचल
एएमयू किशनगंज केंद्र लंबे समय से सीमांचल में उच्च शिक्षा के विस्तार से जुड़े मुद्दों के केंद्र में रहा है. प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि केंद्र का समुचित विकास होने से किशनगंज और आसपास के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिल सकते हैं.
इसी संदर्भ में एआईएमआईएम नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के सामने केंद्र के विकास और उससे जुड़े लंबित मामलों को प्रमुखता से रखा. नेताओं ने सीमांचल में उच्च शिक्षा की जरूरत और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया.
फंड और शिक्षकों की नियुक्ति का मुद्दा भी उठा
ताजा जानकारी के अनुसार मुलाकात में एएमयू किशनगंज केंद्र के लिए फंड और शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े विषय भी उठाये गये. एआईएमआईएम ने केंद्र के लिए प्रस्तावित 29 शिक्षण पदों को जल्द मंजूरी देने की मांग की है. इनमें चार प्रोफेसर, छह एसोसिएट प्रोफेसर और 19 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद शामिल हैं.
शिक्षकों की पर्याप्त संख्या किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में इन पदों की स्वीकृति और नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ने से केंद्र की शैक्षणिक गतिविधियों को मजबूती मिलने की उम्मीद जतायी गयी है.
निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं का भी समाधान मांगा
प्रतिनिधिमंडल की ओर से एएमयू किशनगंज केंद्र के निर्माण कार्य से जुड़े मुद्दे भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के सामने रखे गये. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार केंद्र की जमीन पर निर्माण को लेकर नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा यानी एनएमसीजी से संबंधित प्रतिबंधों का मुद्दा भी उठाया गया है. एआईएमआईएम ने इस मामले में समाधान या कानूनी रूप से संभव राहत देने की मांग की है.
केंद्र का आधारभूत ढांचा विकसित होने के बाद ही विद्यार्थियों को शिक्षण, पुस्तकालय, प्रयोगशाला और अन्य सुविधाओं का पूरा लाभ मिल सकेगा. इसलिए निर्माण से जुड़े मामलों का समाधान भी इस पूरे मुद्दे का अहम हिस्सा है.
सीमांचल के विद्यार्थियों के लिए क्यों अहम है यह केंद्र
किशनगंज और सीमांचल के दूसरे जिलों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के बेहतर संस्थानों तक पहुंच एक महत्वपूर्ण विषय है. स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की सुविधाएं मजबूत होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों पर निर्भरता कम हो सकती है.
इसी वजह से एएमयू किशनगंज केंद्र का विकास केवल एक संस्थान के विस्तार का विषय नहीं है. इसका संबंध स्थानीय विद्यार्थियों के शैक्षणिक अवसर और क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विस्तार से भी जुड़ा है. एआईएमआईएम नेताओं ने इसी संदर्भ में केंद्र को मजबूत करने की मांग रखी.
शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?
मिली जानकारी के अनुसार केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने प्रतिनिधिमंडल की ओर से रखे गये विषयों को सुना और संबंधित मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया. एआईएमआईएम की ओर से मुलाकात के बाद भी कहा गया कि मंत्री ने एएमयू किशनगंज केंद्र के मामले में समाधान की दिशा में प्रयास का भरोसा दिया है.
हालांकि अब महत्वपूर्ण यह होगा कि आश्वासन के बाद संबंधित मामलों में प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है. शिक्षकों के पदों की मंजूरी, फंड से जुड़े लंबित मामलों और निर्माण संबंधी बाधाओं पर निर्णय केंद्र के आगे के विकास की दिशा तय करेगा.
AMU Kishanganj Centre: प्रतिनिधिमंडल में ये नेता रहे मौजूद
मुलाकात में एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन, विधायक सरवर आलम, विधायक तोसीफ आलम सहित अन्य विधायक और किशनगंज जिलाध्यक्ष गुलाम हुसैन मौजूद रहे.
एएमयू किशनगंज केंद्र के विकास के साथ प्रतिनिधिमंडल ने सीमांचल और बिहार से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री से चर्चा की. अब स्थानीय स्तर पर नजर इस बात पर रहेगी कि मुलाकात में उठाये गये मुद्दों पर विभागीय स्तर से आगे क्या कार्रवाई होती है.
एएमयू केंद्र को लेकर एक बार फिर केंद्रीय स्तर पर हुई यह पहल किशनगंज में उच्च शिक्षा और संस्थागत विकास के सवाल को चर्चा में ले आयी है. आने वाले दिनों में प्रस्तावित पदों, फंड और निर्माण से जुड़े मामलों पर होने वाली कार्रवाई ही इस मुलाकात के असर को स्पष्ट करेगी.
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