ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Aluabari Rail: कटिहार रेल मंडल के अंतर्गत रेल लाइनों के दोहरीकरण (डबल लाइन) कार्य को लेकर रेलवे प्रशासन ने बड़े मेगा ब्लॉक की घोषणा की है. इसके तहत आगामी 7 जून से 14 जून 2026 तक कटिहार–सोनैली और कटिहार–कुरेठा रेलखंड के बीच इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (BPNI, Pre-NI और NI) का काम किया जाएगा. इस विकास कार्य के कारण इस रूट की कई लोकल, पैसेंजर, डीएमयू (DMU) और मेमू (MEMU) ट्रेनों को जहां पूरी तरह रद्द कर दिया गया है, वहीं पूर्वोत्तर भारत (North-East) को जोड़ने वाली दर्जनों महत्वपूर्ण लंबी दूरी की एक्सप्रेस व सुपरफास्ट ट्रेनों को कटिहार–पूर्णिया–अररिया–ठाकुरगंज–सिलीगुड़ी के वैकल्पिक मार्ग से डायवर्ट कर चलाने का निर्णय लिया गया है.
संकट का साथी: इतिहास गवाह है, जब-जब मुख्य रूट ठप हुआ, ठाकुरगंज ने संभाला
पिछले डेढ़ दशक का रेल इतिहास गवाह है कि जब भी पूर्वोत्तर भारत की मुख्य रेल जीवनरेखा पर कोई आपदा आई है, ठाकुरगंज रेलखंड हमेशा संकटमोचक बनकर उभरा है:
- 2011 का रेल हादसा (मालगाड़ी अग्निकांड): दिसंबर 2011 में आलुआबाड़ी और मांगुरजान स्टेशन के बीच तेल टैंकरों से भरी मालगाड़ी के बेपटरी होने के बाद भीषण आग लग गई थी. मुख्य रेलमार्ग हफ्तों ठप रहा, तब इसी ठाकुरगंज-आलुआबाड़ी रूट ने पूर्वोत्तर की जीवनरेखा बनकर ट्रेनों को रास्ता दिया था.
- 2024 का कंचनजंगा एक्सप्रेस हादसा: 17 जून 2024 को पश्चिम बंगाल के रंगापानी के समीप हुए कंचनजंगा एक्सप्रेस रेल हादसे के बाद जब मुख्य अप-डाउन लाइन बाधित हुई, तब राजधानी और एक्सप्रेस ट्रेनों का पूरा लोड इसी ठाकुरगंज रेलखंड ने संभाला था.
7 से 14 जून तक डायवर्ट रहने वाली प्रमुख ट्रेनों की सूची
रेलवे द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, ब्लॉक अवधि के दौरान ठाकुरगंज रेलखंड से गुजरने वाली मुख्य ट्रेनों का शेड्यूल इस प्रकार है:
- 7 जून 2026: 15672 रोहतक–कामाख्या एक्सप्रेस
- 8 जून 2026: 15078 गोमतीनगर–कामाख्या एक्सप्रेस, 15716 अजमेर–किशनगंज गरीब नवाज एक्सप्रेस, 11031 पनवेल–अलीपुरद्वार एक्सप्रेस और 15651 लोहित एक्सप्रेस.
- अन्य वीआईपी ट्रेनें: इसी अवधि के दौरान डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस, अमरनाथ एक्सप्रेस, डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस, भगत की कोठी एक्सप्रेस और अरुणाचल एसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस भी इसी डायवर्टेड रूट (ठाकुरगंज होकर) से अपनी दूरी तय करेंगी.
बड़ा सवाल: संकट में याद आता है यह रूट, तो फिर आम दिनों में उपेक्षा क्यों?
जनता की आवाज: इस बड़े बदलाव के बीच सीमांचल के रेल प्रेमियों और स्थानीय यात्रियों में रेलवे की दोहरी नीति को लेकर गहरा आक्रोश है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब यह रेलखंड इतना सक्षम और मजबूत है कि देश की सबसे प्रीमियम ट्रेनों (राजधानी और एसी एक्सप्रेस) का भार सुरक्षित ढंग से संभाल सकता है, तो फिर आम दिनों में इसके विकास को लेकर सौतेला व्यवहार क्यों किया जाता है?
ठाकुरगंज, गलगलिया और पौआखाली स्टेशनों पर सुविधाओं का अभाव
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग:
स्थानीय यात्रियों का आरोप है कि जब भी किसी बड़े ब्लॉक या हादसे के कारण इस रूट पर ट्रेनों का दबाव बढ़ता है, तो स्थानीय पैसेंजर और इंटरसिटी ट्रेनों को रद्द कर दिया जाता है, जिससे यहां के दैनिक यात्रियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ती है. इसके बदले में क्षेत्र को न तो नई ट्रेनों का ठहराव मिलता है और न ही स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जाता है.
ठाकुरगंज, गलगलिया, पौआखाली और आलुआबाड़ी जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर आज भी प्लेटफॉर्म विस्तार, फुट ओवरब्रिज (FOB), आधुनिक शेड और उचित यात्री सुविधाओं का घोर अभाव है. क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने रेल मंत्रालय से सीधे सवाल किया है कि क्या ठाकुरगंज रेलखंड को रेलवे ने सिर्फ एक “आपातकालीन स्टेपनी (वैकल्पिक व्यवस्था)” के रूप में छोड़ रखा है, या कभी इसे पूर्वोत्तर भारत के एक स्थायी, मजबूत और रणनीतिक रेल कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कोई ठोस कदम उठाया जाएगा? जो रूट संकट में देश को संभालता है, वह विकास के समय भी उतने ही सम्मान का हकदार है.
