किशनगंज जिले के पोठिया प्रखंड मुख्यालय के समीप सार्वजनिक उपयोग के लिए लगा चापाकल पिछले कई महीनों से खराब पड़ा है, जिससे स्थानीय लोगों सहित विभिन्न सरकारी कार्यों से प्रखंड मुख्यालय आने वाले ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. भीषण गर्मी के मौसम में सार्वजनिक पेयजल स्रोत बंद होने से खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की फजीहत हो रही है.
18 जुलाई को विधायक से की गई थी शिकायत
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि चापाकल की खराबी को लेकर उन्होंने कई बार अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया है:
- विधायक को सौंपी गई थी समस्या: बीते 18 जुलाई को ही स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचे क्षेत्रीय विधायक से चापाकल खराब होने की शिकायत कर इसे तुरंत ठीक कराने की मांग की थी.
- प्रशासनिक अनदेखी: विधायक के अलावा प्रखंड विकास पदाधिकारी (BEO) एवं लोक स्वास्थ्य प्रमंडल (PHED) के संबंधित अधिकारियों को भी लिखित व मौखिक जानकारी दी गई. हालांकि, कई हफ्ते बीत जाने के बाद भी अब तक चापाकल की मरम्मत नहीं कराई जा सकी है.
गरीब व दूर-दराज से आए लोगों के लिए बना संकट
प्रखंड कार्यालय परिसर और मुख्यालय बाजार में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोग अपने प्रशासनिक, कृषि और व्यक्तिगत कार्यों के लिए पहुंचते हैं:
- खरीदकर पानी पीने की मजबूरी: आर्थिक रूप से सक्षम लोग तो ₹10 से ₹20 खर्च कर मिनरल वाटर की बोतलें खरीद लेते हैं.
- गरीब तबके पर मार: दूर-दराज के गांवों से पहुंचे गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए सार्वजनिक चापाकल ही एकमात्र सहारा था, जिसके ठप होने से उन्हें पानी की एक-एक बूंद के लिए भटकना पड़ रहा है.
प्रशासनिक व्यवस्था और दावों पर उठे सवाल
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब स्वयं प्रखंड विकास पदाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे स्थित चापाकल महीनों तक खराब रह सकता है, तो सुदूर देहाती और ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजना और चापाकल मरम्मत की जमीनी स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.
क्षेत्रीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल संज्ञान लेते हुए चापाकल की मरम्मत कराने तथा पेयजल आपूर्ति बहाल करने की पुरजोर मांग की है.
