KISHANGANJ पुस्तकों की ओर लौटा रुझान, मोबाइल दौर में भी दिखी पढ़ने की ललक
जहां एक ओर आज की पीढ़ी मोबाइल और स्क्रीन तक सिमटती नजर आती है, वहीं भारत सेवाश्रम संघ के वार्षिक महोत्सव में इसका उल्टा दृश्य देखने को मिला.
ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
: जहां एक ओर आज की पीढ़ी मोबाइल और स्क्रीन तक सिमटती नजर आती है, वहीं भारत सेवाश्रम संघ के वार्षिक महोत्सव में इसका उल्टा दृश्य देखने को मिला. कार्यक्रम स्थल पर लगे पुस्तक स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे और युवा से लेकर बुजुर्ग तक किताबों में खास दिलचस्पी लेते दिखे . दूरदराज से आये श्रद्धालु अपनी पसंद की आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकों को तलाशते नजर आए . खास बात यह रही कि यहां ऐसी पुस्तकें भी उपलब्ध थीं, जो सामान्य दिनों में आसानी से नहीं मिलतीं . यही वजह रही कि स्टॉल पर दिनभर लोगों की भीड़ बनी रही . आयोजन से जुड़े कार्यकर्ता प्रदीप दत्ता , हेमंती लाहिड़ी आदि ने बताया कि इस तरह के धार्मिक कार्यक्रम केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहते, बल्कि ज्ञान और विचार के आदान-प्रदान का भी माध्यम बनते हैं . पुस्तकों के जरिए लोग संतों के विचारों और जीवन दर्शन से जुड़ते हैं, जो उन्हें मानसिक रूप से समृद्ध करता है . वहीं उपस्थित लोगों का कहना था कि किताबें आज भी सबसे भरोसेमंद साथी हैं, जो व्यक्ति को सही दिशा दिखाती हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करती हैं . इस दौरान बिलकू लाहिड़ी ने बताया की महोत्सव के दौरान संतों द्वारा लिखी गई पुस्तकों की अच्छी बिक्री इस बात का संकेत रही कि डिजिटल युग के बावजूद किताबों का महत्व आज भी कायम है और लोगों में पढ़ने की ललक अब भी जिंदा है ,