पहाड़कट्टा. बुढ़नई पंचायत के गलगलिया पुल टप्पू स्थित ऐतिहासिक सूफी असद अली के मजार पर तीन दिवसीय सालाना उर्स की शुरूआत रविवार को पारंपरिक चादरपोशी के साथ की गयी. इस अवसर पर अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी. मान्यता है कि टप्पू मजार शरीफ में सच्चे दिल से मांगी गयी हर मन्नत पूरी होती है, यही वजह है कि यहां न केवल बिहार के विभिन्न जिलों से, बल्कि पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल से भी हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं.
साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल है टप्पू शरीफ मजार
यह मजार क्षेत्र में साम्प्रदायिक सौहार्द की एक अनुपम मिसाल पेश करता है. उर्स के दौरान बड़ी संख्या में हिन्दू समुदाय के लोग भी यहां पहुंचकर मत्था टेकते हैं व दुआएं मांगते हैं. सोमवार को उर्स के दूसरे दिन भी अकीदतमंदों का तांता लगा रहा. स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि मंजर आलम ने बताया कि करीब एक सौ वर्षों से टप्पू शरीफ मजार पर प्रत्येक वर्ष बंगला कैलेंडर के अनुसार पहली चैत्र से तीन दिवसीय उर्स का आयोजन ग्रामीणों के सहयोग से किया जा रहा है. रविवार को कमेटी के सदस्यों द्वारा उर्स का विधिवत शुभारंभ किया गया.
प्रशासन मुस्तैद, पुलिस बल की देखरेख में चल रहा आयोजन
भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. अकीदतमंदों की सुविधा के लिए पेयजल, शौचालय व रोशनी की समुचित व्यवस्था की गयी है. विधि-व्यवस्था की कमान पोठिया थानाध्यक्ष अंजय अमन स्वयं संभाले हुए हैं. सुरक्षा के मद्देनजर बड़ी संख्या में पुलिस पदाधिकारियों व सशस्त्र बलों को प्रतिनियुक्त किया गया है. उर्स के दौरान दर्जनों मुस्लिम धर्मगुरु भी शिरकत कर रहे हैं, जहां लगातार तीन दिनों तक कुरान-ए-पाक पर आधारित तकरीरें की जा रही हैं.