बच्चों के भविष्य के साथ सरकार कर रही खिलवाड़

किशनगंज : एक दिन पहले जारी किये गये इंटरमीडिएट के रिजल्ट में दो तिहाई बच्चे फेल हो गये है़ इसकी पूरी जिम्मेदारी बिहार सरकार को लेनी चाहिए़ यह रिजल्ट केवल संसाधनों की कमी के साथ-साथ परीक्षा में बरती जा रही कुव्यवस्था के कारण है और आश्चर्य तो यह है कि मुख्यमंत्री अपनी बदनामी से बचने […]

किशनगंज : एक दिन पहले जारी किये गये इंटरमीडिएट के रिजल्ट में दो तिहाई बच्चे फेल हो गये है़ इसकी पूरी जिम्मेदारी बिहार सरकार को लेनी चाहिए़ यह रिजल्ट केवल संसाधनों की कमी के साथ-साथ परीक्षा में बरती जा रही कुव्यवस्था के कारण है और आश्चर्य तो यह है कि मुख्यमंत्री अपनी बदनामी से बचने के लिए फिर से एक्शन प्लान और कंम्पार्टमेंटल परीक्षा की बात करने लगे है़

यह बातें एमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही़ उन्होंने कहा कि पांच बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले चुके एवं विगत 12 वर्षों से बिहार में शासन करने वाले इस मुख्यमंत्री की अब तक शिक्षा की जमीनी हकीकत का अंदाजा नहीं है. अब वे फिर से एक्शन प्लान की बात कर लोगों को गुमराह कर रहे है़ नीतीश कुमार हमेशा से आंकड़ों की बाजीगरी के जरिये शिक्षा सूचकांक को उपर दिखाने की कोशिश करते रहे है़

जबकि इनके विद्यालयों में संसाधनों का घोर अभाव है़ सर्व शिक्षा अभियान के पैसों से बनी विद्यालय की दिवारों को ये शिक्षा समझ बैठे है़ जबकि विद्यालय में शिक्षकों का घोर अभाव है़ कहने को उच्च विद्यालयों का अपग्रेड कर प्लस टू बना दिया गया है बच्चे नामांकन भी लिये है मगर बिना शिक्षक के इन विद्यालयों में व कॉलेजों में पढ़ाई की कैसी कल्पना की सकती है़ इस रिजल्ट में जो भी प्रतिशत है अधिकतम बच्चे प्राइवेट शिक्षण संस्थान व कोचिंग के है़

इस रिजल्ट में गरीब किसान, मजदूर के बच्चों केा झेलना पड़ा है जो प्राइवेट संस्थानों में नहीं पढ़ सकते है़ श्री ईमान ने कहा कि पिछले वर्ष रूबी टॉपर प्रकरण से यह सिद्ध हो गया है कि किस प्रकार रूपयों का लेन देन कर बच्चों केा बिना पढ़े पास किया जाता है़ इस बार थोड़ी सख्ती बरती गयी और कॉपी जांच करने वाले सतर्क हुए तो दो तिहाई बच्चे फेल हो गये़ यह विफलता बच्चों से ज्यादा बिहार सरकार की है़ यदि सरकार उचित संसाधन मुहैया करवाती तो आज इस प्रकार का रिजल्ट देखने को नहीं मिला़ श्री ईमान ने कहा कि खनिज संपदा एवं कल कारखाना विहीन इस राज्य के विकास के लिए शिक्षा और इसके गुणवत्ता पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है. मगर सरकार शराब के बोतलों में उलझ कर रह गयी है़ रिजल्ट से आश्चर्य चकित बच्चों के खुदकुशी की भी कई खबरे आ रही है़

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >