किशनगंजः किशनगंज एजुकेशनल मूवमेंट फॉर एएमयू के बैनर तले आंदोलन करने व इस दौरान तोड़फोड़ मामले में अरोपित केंद्रीय मंत्री तारिक अनवर समेत कई मंत्री और विधायकों को बड़ी राहत मिली है. सीजेएम न्यायालय में पेश हुए सभी आरोपितों को जमानत दे दी गयी है. उन पर एएमयू की विशेष शाखा के लिए जमीन मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाने का भी आरोप था.
जानकारी के अनुसार धरना-प्रदर्शन, नाजायज मजमा लगाने, उत्तेजक व अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करने के साथ-साथ सड़क व रेल यातायात जाम करने और समाहरणालय गेट के पास लगे सरकारी विज्ञान के होर्डिग को तोड़ कर नष्ट करने के आरोपित केंद्रीय मंत्री तारिक अनवर, केंद्रीय राज्य मंत्री सह रायगंज से सांसद दीपा दास मुंशी, स्थानीय सांसद मौलाना असरारुल हक कासमी, कोचाधमान विधायक अख्तरूल ईमान, बिहार विधान परिषद सदस्य तनवीर हसन, एमएलसी गुलाम गौस, बहादुरगंज विधायक तौसीफ आलम, पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री चौधरी अब्दुल करीम, बंगाल के विधायक इमरान अली रम्ज उर्फ विक्टर, बायसी के पूर्व विधायक हाजी अब्दुल सुभान, समस्तीपुर के पूर्व सांसद आलोक मेहता, पूर्व जिप अध्यक्ष फैयाज आलम, वार्ड पार्षद असगर अली उर्फ पीटर, सफी अहमद, नसीम अख्तर, गुड्डू सरफराजी, गुलाम साहिद, मुखिया पिंटू चौधरी जमानत के लिए सीजेएम न्यायालय में पेश हुए.
सीजेएम ने सभी अभियुक्तों को जमानत दे दी. विदित हो कि एएमयू की विशेष शाखा के लिए जमीन मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाने के लिए किशनगंज एजुकेशनल मूवमेंट फॉर एएमयू के बैनर तले धरना प्रदर्शन व आंदोलन किया गया था. इसमें उक्त सभी अभियुक्त समेत हजारों लोग शामिल हुए थे. इस मामले में धरना प्रदर्शन स्थल पर बतौर मजिस्ट्रेट तैनात जिला मत्स्य पदाधिकारी सरोज कुमार ने वीडियो फुटेज के आधार पर उक्त सभी आरोपी समेत कुल 33 लोगों को नामजद व सैकड़ों अन्य लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी थी. पुलिस ने किशनगंज थाना कांड संख्या 415/11 के अंतर्गत भादवि की धारा 143, 147, 290, 427, 431 एवं लाउडस्पीकर अधिनियम 1955 के तहत आरोपी बनाया था. इस मामले में स्थानीय कांग्रेसी विधायक डॉ जावेद आजाद जोगबनी के विधायक जाकिर अनवर भी नामजद अभियुक्त हैं.
