सिर से उठा पिता का साया, तो गुरु ने घर में रखकर बनाया टॉपर

अनुसूचित जनजाति युवक रवि सोरेन को अपने घर पर रख पढ़ाया मैट्रिक में रवि ने प्रथम श्रेणी से पास कर विद्यालय का बना टॉपर दिघलबैंक : कौन कहता है आसमा में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर को तबीयत से उछालो यारो ़ दुष्यंत की इस पंक्ति को गंधर्वडांगा निवासी शिक्षक अभिराम कुमार ने साकार […]

अनुसूचित जनजाति युवक रवि सोरेन को अपने घर पर रख पढ़ाया

मैट्रिक में रवि ने प्रथम श्रेणी से पास कर विद्यालय का बना टॉपर
दिघलबैंक : कौन कहता है आसमा में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर को तबीयत से उछालो यारो ़ दुष्यंत की इस पंक्ति को गंधर्वडांगा निवासी शिक्षक अभिराम कुमार ने साकार किया है़ तभी तो पिछले सात वर्षों से उनके घर में रह कर शिक्षा पूरी कर रहे रवि सोरेन ने रविवार को प्रकाशित बिहार मैट्रिक बोर्ड की परीक्षा में प्रथम श्रेणी से सफलता हासिल करते हुए अपने विद्यालय में टॉपर बनने का गौरव प्राप्त किया है़ लेकिन उसका अतीत उतना सुखद नहीं रहा है़
दिघलबैंक प्रखंड के कोढ़ोबाड़ी थाना क्षेत्र के लोहागाड़ा में जन्मे रवि सोरेन के सर से पिता का साया बचपन में ही उठ गया और आर्थिक तंगी से जूझ रही उनकी माता मैना हेंब्रम ने उसका नामांकन घर से 20 किमी दूर मध्य विद्यालय गंधर्वडांगा में संचालित आरपीसी केंद्र में साल 2009 में करा दिया़ जहां के विद्यालय प्रधान अभिराम कुमार के देख रेख में उसकी पढाई जारी है़ लेकिन निर्धारित समय के लिए संचालित आरपीसी केंद्र के बंद होने के बाद एक बार फिर उसके सामने आगे की पढ़ाई जारी रखना चुनौती भरा ही नहीं अपितु काफी कठिन साबित हो रहा था़
ऐसे में उस समय गंधर्वडांगा विद्यालय के प्रधानाध्यापक अभिराम कुमार ने रवि की परेशानी को देखते हुए उसे आगे पढ़ाने के साथ साथ रहने खाने की सारी जिम्मेवारी अपने उपर लेते हुए उसे अपने परिवार का सदस्य बना लिया और आज नतीजा सबके सामने है़ रेाबिन भी अपने गुरू को पिता तूल्य ही समझता है़ वहीं रोबिन की मां अपने बेटे के सफलता से फुले नहीं समा रही है और कहती है कि अभिराम जी हमारे लिए किसी मसीहा से कम नहीं है़ जबकि रवि की सफलता से उनके गुरू सह अभिभावक अभिराम कुमार भी काफी खुश है़ उन्होंने बताया कि जब तक रवि को सरकारी नौकरी नहीं मिल जाती तब तक सभी जिम्मेदारी हमारी है़

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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