पदाधिकारियों की लापरवाही के कारण जिले की स्वास्थ्य सुविधा चरमरा गयी है. सदर अस्पताल सहित पीएचसी में साफ-सफाई, जेनेरेटर सुविधा, धुलाई नहीं हो पा रही है.
किशनगंज : जिले के सदर अस्पताल सहित सभी उप स्वास्थ्य केंद्र की साफ सफाई, जेनेरेटर सुविधा, धुलाई आदि के साथ साथ मरीजों को प्रतिदिन दिये जाने वाले भोजन का जिम्मा गत 11 मार्च से ही राज इनफोरमेटिक्स कंस्ट्रक्शन कंपनी व मेसर्स कृष्णा कंस्ट्रक्शन कंपनी नामक एनजीओ को दिये जाने के बाद से जिले की स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से चरमरा गयी है.
हालांकि जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल की स्थिति जिले के अन्य पीएचसी से काफी बेहतर है. विभागीय पदाधिकारी की मिलीभगत से प्रतिदिन राज्य सरकार को लाखों रुपये का चुना लगाने का कार्य एनजीओ द्वारा बदस्तूर जारी है. सदर अस्पताल के बाद मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा प्रदान करने वाले कोचाधामन, ठाकुरगंज, बहादुरगंज, दिघलबैंक पीएचसी में स्थिति और भी भयानक है. परंतु विभागीय पदाधिकारी जीयो और जीने दो की नीति पर सब कुछ सामान्य बनाने की जुगत में लग गये है. नतीजतन भोजन, बिजली व साफ-सफाई के घोर अभाव से त्रस्त मरीजों व उनके परिजनों द्वारा प्रतिदिन आक्रोश व्यक्त करने का दौर भी बदस्तूर जारी है.
दवा हो रही बेकार
जेनेरेटर सुविधा के अभाव के कारण पीएचसी में रखे लाखों रुपये मूल्य की जीवन रक्षक दवा भी अब खराब होने लगी है. इसके बावजूद भी विभागीय पदाधिकारी की कुंभकर्णी निद्रा भंग होने का नाम ही नहीं ले रही है.
नहीं मिला भोजन
ठाकुरगंज पीएचसी की बात करें तो सोमवार तक भरती मरीजों को न तो भोजन उपलब्ध कराया गया है और ना ही जेनेरेटर सुविधा ही मुहैया करायी गयी थी. अस्पताल परिसर में चारों ओर गंदगी का अंबार लगा था और भरती मरीज भीषण बदबू के बीच इलाज कराने को बाध्य थे.हालांकि अस्पताल कर्मियों के निजी प्रयासों से प्रसव कक्ष की साफ सफाई व्यवस्था की गयी थी.
किया था हंगामा
वहीं कोचाधामन पीएचसी में तो रविवार संध्या भोजन व जेनेरेटर सुविधा उपलब्ध न होने को ले भरती मरीजों व परिजनों ने जम कर बवाल भी किया था. इसके बावजूद भी पीएचसी प्रभारी की मिलीभगत से एनजीओ कर्मी सोमवार तक स्थिति को जस की तश बनाये रखा था.
