चिल्हनियां के गांवों तक नहीं पहुंचा विकास
टेढ़ागाछ(किशनगंज) : प्रखंड क्षेत्र का एक ऐसा गांव जहां के लोग विकास को तरस रहे है और उनकी व्यथा सुन कर कोई भी भावुक हो जाये. यहां न सड़क है ल बिजल और न ही स्वास्थ्य, शिक्षा व शुद्ध जल की समुचित सुविधा ही उपलब्ध है. हालात ऐसी कि मानो पूरे गांव की लगभग एक […]
टेढ़ागाछ(किशनगंज) : प्रखंड क्षेत्र का एक ऐसा गांव जहां के लोग विकास को तरस रहे है और उनकी व्यथा सुन कर कोई भी भावुक हो जाये.
यहां न सड़क है ल बिजल और न ही स्वास्थ्य, शिक्षा व शुद्ध जल की समुचित सुविधा ही उपलब्ध है. हालात ऐसी कि मानो पूरे गांव की लगभग एक हजार आबादी आज भी 18वीं सदी में जी रहे हों और उसका खामियाजा यहां के युवा पीढ़ी को भुगतना पड़ रहा है.
इस गांव में संबंध करने से कतराते है अन्य गांव के लोग . क्योंकि सुविधा विहीन इस गांव में कोई अपना संबंध तक जोड़ने को तैयार नहीं है. मामला चिल्हानिया पंचायत के चिल्हानियां गांव व बिहार मुशहरी टोला व देवरी की सीमा पर बसे खाड़ी टोला चैनपुर गांव की है.
जहां की कुछ आबादी चिल्हानिया पंचायत का हिस्सा है. तो कुछ दुर्गापुर के लेकिन दोनों पंचायतों द्वारा यहां एक अदद ईंट सोलिंग या आरसीसी सड़क तब नाने का जमहत नहीं उठाया गया.
रेतुआ नदी के कटाव से प्रखंडवासी परेशान . रेतुआ नदी के निरंतर कटाव के कारण उपजाउ भूमि के साथ साथ बसावट वाले भूमि में भी कमी आती जा रही है और गांव टापू में तब्दील हो चुका है.
इसी गांव के हरी झा की माने तो गांव में लगभग 80 लड़कियों व 50 लड़के जो शादी के योग्य है लेकिन सुविधा विहीन होने के कारण इनका रिश्ता नहीं हो पा रहा है. क्योंकि नदी के कारण अन्य गांव के लोग यहां आने जाने से गुरेज करते है. साथ ही उन्होंने बताया कि नदी के कारण यहां के लोग समय पर स्वास्थ्य सेवा से वंचित रह जाते है.
समय पर यास तो झोला छाप डॉक्टर ही उनके लिए मसीहा साबित होते है या फिर उनकी मौत ही हो जाती है. जिसका ज्वलंत उदाहरण लगभग 35 वर्षीय महिला पतासी देवी की मौत है. जिसका निधन बरसात के समय अस्पताल नहीं पहुंचने के कारण हो गया था.