किशनगंज : झारखंड मुक्ति मोरचा के बैनर तले सोमवार को सैकड़ों की संख्या में पारंपरिक हथियारों से लैस आदिवासी समुदाय के महिला-पुरुष ने राष्ट्रीय उच्च पथ 31 को जाम कर दिया. तकरीबन डेढ़ घंटे तक किशनगंज देश के सभी हिस्सों से कटा रहा. आदिवासी समुदाय अपनी 23 सूत्री मांगों के साथ सड़क पर उतरे थे. सड़क पर उतरे आदिवासी की तेवर इतने तल्ख थे कि स्कूली बच्चों तक को रोक दिया गया.
आदिवासियों का अगुवाई करते हुए अधिवक्ता इंद्रदेव पासवान ने कहा कि 31 जुलाई को इन्हीं मांगों के साथ समाहरणालय के सामने धरना दिया गया था और डीएम द्वारा आश्वासन मिलने के बावजूद आज तक ऐसी मांगे जो जिला प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में है पूरी नहीं हो सकी. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन आदिवासी को कमजोर और नीरीह समझने की भूल ना करें.
उन्होंने कहा कि सड़क पर शांतिपूर्ण तरीका से उतरने के बावजूद भी प्रशासन ने सुधि नहीं ली तो आगे होने वाली आंदोलन आर पार की होगी और प्रशासन इसे संभाल नहीं पायेगी. उन्होंने कहा कि भूमाफिया द्वारा गरीबों की बंदोबस्त जमीन को जबरन अतिक्रमित कर गरीबों को बेदखल किया जा रहा है और प्रशासन तमाशबीन बनी हुई है.
उन्होंने कहा कि एससी एसी मामलों के अभियुक्त को पुलिस 41 (1) भारतीय दंड विधान का उपयोग कर थाना से ही निजी मुचलके पर दी जा रही है. उन्होंने कहा कि इस मामले में अभियुक्त को अग्रिम जमानत तक नहीं देने का प्रावधानहै. उन्होंने कहा कि ऐसे पुलिस पदाधिकारियों के विरूद्घ तत्काल मामला दर्ज हो तो सब कुछ ठीक हो जायेगा.
घटना की सूचना मिलते ही एसडीपीओ कामिनी वाला, थानाध्यक्ष आफताब अहमद सदलबल पहुंच कर वार्ता किया एवं आश्वस्त किया कि ऐसे मामलों का पुन: पुनरीक्षण करवाया जायेगा. साथ जमीनी विवाद तीन महीना के अंदर समझाने का आश्वासन दिया. आश्वासन के बाद सभी वापस चले गये और आवागमन सुचारू हो सका.
