गर्भवती को 180 आयरन व कैल्शियम की गोलियां दी जाती नि:शुल्क- सीएम
गर्भावस्था का समय हर महिला के जीवन का सबसे संवेदनशील व महत्वपूर्ण चरण होता है
-स्वस्थ मां से ही स्वस्थ पीढ़ी का निर्माण: एनीमिया नियंत्रण को लेकर सतर्क हुआ स्वास्थ्य विभाग
किशनगंज
गर्भावस्था का समय हर महिला के जीवन का सबसे संवेदनशील व महत्वपूर्ण चरण होता है. इस दौरान मां के स्वास्थ्य का सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर पड़ता है. लेकिन इसी महत्वपूर्ण समय में एनीमिया (रक्त की कमी) एक गंभीर चुनौती बनकर सामने आता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जिले में बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं, जो मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को बढ़ाने वाला एक प्रमुख कारण बन सकता है.
एनीमिया तब होता है जब शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है. इसकी कमी से कमजोरी, थकान, चक्कर आना, सांस फूलना और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं. महिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शबनम यास्मीन बताती हैं कि गर्भावस्था के दौरान लगभग 80 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से प्रभावित होती हैं. यदि समय पर ध्यान नहीं दिया जाए, तो यह प्रसव के दौरान जटिलताओं और शिशु के कम वजन का कारण बन सकता है. गंभीर स्थिति में यह मां और शिशु दोनों के लिए जानलेवा भी हो सकता है.
एनीमिया मुक्त भारत अभियान: घर-घर पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाएं
सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी के अनुसार, जिले में एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत लगातार जागरूकता और सेवाएं प्रदान की जा रही हैं. उन्होंने बताया कि आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और किशोरियों को आयरन फोलिक एसिड (आईएफए) की गोलियां नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं. ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) और उपस्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को 180 आयरन और कैल्शियम की गोलियां नि:शुल्क दी जाती हैं. साथ ही उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच भी सुनिश्चित की जाती है. उन्होंने यह भी बताया कि हाल के आंकड़ों के अनुसार जिले में आयरन एवं कैल्शियम टैबलेट वितरण में संतोषजनक प्रगति दर्ज की गई है, जो स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता को दर्शाता है.
संतुलित आहार ही है सबसे बड़ा समाधान
सिविल सर्जन ने कहा कि एनीमिया का मुख्य कारण पोषण की कमी है, जिसे संतुलित आहार और नियमित दवा सेवन से नियंत्रित किया जा सकता है.उन्होंने गर्भवती महिलाओं को सलाह दी कि वे अपने दैनिक आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, अनार, अमरूद, केला, गाजर, टमाटर, गुड़, सूखे मेवे, अंडा, मछली और दाल जैसी पोषक चीजों को शामिल करें. यह खाद्य पदार्थ शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायक होते हैं.