किशनगंज : भारतीय संस्कृति व परम्पराओं में वट-सावित्री व्रत महत्वपूर्ण है. यह व्रत जेष्ठ माह की आमवस्या को हर वर्ष धूमधाम से मनाया जाता है. भारतीय संस्कृति व परंपरा में पति को परमेश्वर मानकर उनकी लंबी आयु की कामना से यह व्रत किया जाता है़ शहर के विभिन्न स्थानों पर सुहागिनों ने वट वृक्ष के नीचे तथा घरों में भी वट की डाल लगा कर पूजा की एवं भगवान से अपने पति की दीर्घ आयु व सुख समृद्धि की मन्नत मांगी़ शहर में डुमरिया, रूईधासा, कैलटैक्स चौक, मनोरंजन क्लब, सुभाषपल्ली, पश्चिमपाली आदि स्थानों पर महिलाओं की विशेष भीड़ देखी गयी़
पति की लंबी उम्र के लिए सुहागिनों ने की वट सावित्री पूजा
किशनगंज : भारतीय संस्कृति व परम्पराओं में वट-सावित्री व्रत महत्वपूर्ण है. यह व्रत जेष्ठ माह की आमवस्या को हर वर्ष धूमधाम से मनाया जाता है. भारतीय संस्कृति व परंपरा में पति को परमेश्वर मानकर उनकी लंबी आयु की कामना से यह व्रत किया जाता है़ शहर के विभिन्न स्थानों पर सुहागिनों ने वट वृक्ष के […]

ठाकुरगंज प्रतिनिधि के अनुसार आस्था के साथ मनाये जाने वाला पर्व वट सावित्री की पूजा सोमबार को धूमधाम से संपन्न हुई. ज्येष्ट कृष्ण अमावस्या के दिन सुहागन महिलाओं द्वारा वत सावित्री का व्रत रखा जाता है. शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत रख कर वट वृक्ष के नीचे सावित्री सत्यवान और यमराज की पूजा करने से पति की आयु लम्बी होती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है. मान्यता है की सावित्री ने यमराज के फंदे से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी. हिन्दू धर्म के अनुसार वट सावित्री व्रत पूजन सुहागिनों का महत्वपूर्ण पर्व है.
इस दिन वट वृक्ष का पूजन होता है. इस व्रत को सुहागिन अखंड सौभाग्य्वती रहने की मंगल कामना करती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार जब सावित्री पति के प्राण को यमराज के फंदे से छुड़ाने के लिए यमराज के पीछे जा रही थी, उस समय वट वृक्ष ने सत्यवान के शव की देख रेख की थी. पति के प्राण लेकर वापस लौटने पर सावित्री ने वट वृक्ष का आभार व्यक्त करने के लिए उसकी परिक्रमा की थी. इसलिए वट सावित्री पर्व में वटवृक्ष की परिक्रमा होती है.
इस दिन महिलाए सुबह स्नान कर नए वस्त्र धारण कर सोलह श्रृंगार करती है. निर्जला रहते हुए सुहागिन महिलाए वट वृक्ष में कच्चे धागे लपेटते हुए वट वृक्ष की परिक्रमा करती है. वट सावित्री पूजन के समय फल, मिठाइयां, पकवान, भींगा हुआ चना और बांस व ताड़ के बने हुए पंखे चढ़ाती है. उसके बाद सत्यवान सावित्री की कथा सुनती है. इसके बाद सावित्री की तरह वट के पत्त्ते को सर के पीछे लगाकर अपने घर पहुंचती है और सदा सुहागन रहने और भगवान से अपने पति के लम्बे उम्र की कामना करती है.
पौआखाली प्रतिनिधि के अनुसार धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सनातन धर्म में अनेकानेक त्योहारों में से एक वट सावित्री व्रत का त्योहार काफी महत्वपूर्ण त्योहार माना गया है जिस कारण सोमवार के दिन वट सावित्री व्रत पूजा को लेकर क्षेत्र में काफी धूम रही. सुहागिन महिलाओं ने अहले सुबह नहा धोकर नये परिधान में अपने सुहाग की रक्षा एवं दीर्घायु की मन में कामना लिए वट यानि बरगद पीपल पेड़ के नीचे बैठकर पुरे पवित्र मन से पूजा अर्चना की.
सुहागिन महिलाएं सर्वप्रथम कुमकुम अक्षत से पूजा अर्चना करते हुए वट वृक्ष के चारों ओर रक्षा सूत बांधकर सात फेरा लगाते हुए वट वृक्ष के नीचे बैठकर सत्यवान और सावित्री की कथा सुनी और अपने पति के दीर्घायु की कामना की. वट सावित्री की पूजा को लेकर पौआखाली,कादोगांव, जियापोखर, भौलमारा, गौरीचौक, रसिया आदि स्थानों में खूब धुम रही. सुहागिन संतोषी देवी, निशा देवी,ममता देवी, अनीता देवी, आशा देवी इत्यादि ने इस मौके पर पूजा अर्चना कर पति की दीर्घायु की कामना करते हुए गुड़ प्रसाद का वितरण भी किए.
गलगलिया प्रतिनिधि के अनुसार भारत-नेपाल सीमा पर स्थित गलगलिया सहित बंगाल के दांगुजोत गकगलिया बाज़ार रेलवे गेट पुराना बस स्टैंड में सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री की पूजा करती है़ ऐसी मान्यता है कि महिला वट सावित्री की पूजा तो अपने अखंड सौभाग्य और पति की लंबी उम्र की कहानी से जुड़ा है, लेकिन इसमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी निहित है.
ऐसा माना जाता है कि बहुत पहले सावित्री ने अपने पति सत्यवान की प्राण रक्षा के लिए यह व्रत रखा था और अपने पति को मृत्यु के मुंह से खींचकर बाहर लाई थी. इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं. व्रती महिलाएं वट वृक्ष को जल अर्पित करती हैं. साथ ही हल्दी लगे कच्चे सूत से लपेटते हुए वृक्ष की परिक्रमा करती हैं. भारतीय अध्यात्म में माना जाता है कि वटवृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और पत्तों पर शिव का वास होता है. इसलिए लोक मान्यता के अनुसार वट वृक्ष की पूजा से हर तरह से कल्याण होता है. वट वृक्ष का आदर करते हैं
पोठिया प्रतिनिधि के अनुसार प्रखंड में सुहागिन महिलाओं ने पति की लम्बी आयु के लिए सोमवार को वट सावित्री का निर्जला व्रत रखा. ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर परम्परानुसार सुहागिन महिलाओं ने सुबह ध्यान के बाद श्रृंगार कर निर्जला रह वट सावित्री व्रत का मानसिक संकल्प लिया. फिर निकट स्थित वट (बरगद)वृक्ष की घर की बुजुर्ग महिलाओं के साथ विधिवत पूजा अर्चना की. साथ ही बाल बच्चों के साथ सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी और वट वृक्ष की परिक्रमा के बाद वृक्ष में कच्चे सूत के धागे बांधे. इसके बाद श्रृंगार सामग्रियों का दान भी किया. प्रखंड के सभी वट वृक्षों के पास पूजा अर्चना के लिए महिलाओं की भीड़ जुटी रही.
पाठामारी प्रतिनिधि के अनुसार रविवार को सुहागण महिलाओं ने अखंड सौभाग्य की प्राप्ति और पति की लंबी उम्र के लिए सोलह श्रृंगार कर पूरे विधि-विधान पूर्वक वट वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना कर, वृक्ष में मोली धागा बांधते हुए परिक्रमा कर वट सावित्री की पूजा अर्चना किया और कथाएं सुनी. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वट सावित्री की पूजा करने और कथा सुनने से जीवन धन्य हो जाता है. घर धन-धान्य से परिपूर्ण रहता है़ साथ ही सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य के साथ पति के लंबे आयु की भी प्राप्ति होती है. यह पर्व हर वर्ष जेष्ठ माह की अमावस्या को मनाया जाता हैं.