पानी की तरह बहा दिये गये करोड़ों रुपये फिर भी नहीं बुझी शहरवासियों की प्यास

लोगों ने जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से समस्या को हल करने की मांग की किशनगंज : पानी की तरह बह गए करोड़ों रुपये लेकिन शहरवासियों को शुद्ध पेयजल मयस्सर नहीं हुआ.शुद्ध पानी के लिये पानी की तरह सरकारी राशि को बहाकर लोगों को शुद्ध पेयजल तो दूर पानी सफाई करने वाले मशीनें को भी जंग […]

लोगों ने जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से समस्या को हल करने की मांग की

किशनगंज : पानी की तरह बह गए करोड़ों रुपये लेकिन शहरवासियों को शुद्ध पेयजल मयस्सर नहीं हुआ.शुद्ध पानी के लिये पानी की तरह सरकारी राशि को बहाकर लोगों को शुद्ध पेयजल तो दूर पानी सफाई करने वाले मशीनें को भी जंग लग चुका है. किशनगंज शहरवासियों को सरकारी व विभागीय शिथिलता के कारण जलापूर्ति योजना सफेद हाथी साबित हो रही है.हैरत की बात है कि इस ओर प्रशासन के द्वारा कोई पहल नहीं दीख रही है.किशनगंज शहर में लगे जलापूर्ति योजना की पड़ताल शुक्रवार को प्रभात खबर ने की.पड़ताल में कई जलापूर्ति योजना आधा अधूरा बनाकर तैयार बेकार पड़ा है.
कहीं मशीन रख रखाव के अभाव में जंक लगा हुआ है तो कही पाइप व जलापूर्ति योजना में लगे मशीने झाड़ियों से पटे पड़े है.सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर जल योजना लांच कर चुकी है.जब शहर के जलापूर्ति योजना का हाल बेहाल व जर्जर है तो ग्रामीण क्षेत्रो का आलम सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.स्थानीय लोगों ने कहा जलमीनार सरकारी व विभिगीय पेंच में फस कर बीमार पड़ा है.शहर के हजारों परिवार आयरनयुक्त जल पीने को मजबूर है.
असामाजिक तत्वों का बना अड्डा
शहर में बने जलापूर्ति योजना बन्द रहने से इन दिनों आसामाजिक तत्वों का अड्डा बना हुआ है.फरिंगोला व तेघरिया के स्थानीय लोगों ने बताया कि जलापूर्ति योजना प्लांट शराबियों,जुआरियों सहित बदमाशों का सुरक्षित स्थान बन गया है.शाम होते ही जलापूर्ति प्लांट परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगता है.शुद्ध पेयजल आपूर्ति हुई नहीं बल्कि असामाजिक लोगों की पनाहगाह जरूर बनती दिख रही है.
दो लाख की आबादी शुद्ध पेयजल से वंचित. किशनगंज शहर में 34 वार्डो में करीब 2 लाख से अधिक लोग बास्ते है.हर वार्ड में करीब 250 से 300 परिवार रहते है.लेकिन सरकारी सिस्टम ढुलमुल रवैये के कारण शुद्ध पेयजल की आपूर्ति नही है.
अकूत जल, लेकिन शुद्ध पेयजल नहीं
जिले में प्रकृति ने भूगर्भ में अकूत जल स्त्रोत प्रदान किया है.लेकिन शुद्ध पेयजल लोगो को नसीब नही.सरकार ने पीएचईडी के द्वारा शहर के 7 स्थानों पर प्लांट लगाने की पहल की गई.प्लांट बनने के बाद विभागीय व सिस्टम के पेच के कारण लोगो को शुद्ध पेयजलापूर्ति मिलना सपना लगने लगा है.विभागीय सूत्र की माने तो जलापूर्ति योजना जांच का विषय है.
विभागीय रिफायनरी सिस्टम फेल . विभागीय सूत्र की माने तो उच्च स्तरीय जांच करने से विभागीय की रिफायनरी सिस्टम लागू हो जाएगा. शहर के फरिंग्गोला,तेघरिया, मिलनपल्ली,मोहिंउद्दीन, खगड़ा,रुइधासा में करोड़ो की
लागत से बनी जलापूर्ति योजना बना हुआ है लेकिन लोगो के लिये लाभदायक नही.
रख रखाव का घोर अभाव,जलापूर्ति योजना परिसर बना शराबियों का अड्डा,विभागीय पेंच व उदासीनता का दंश झेल रहा जलापूर्ति योजना.

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