सीडीपीओ की प्रताड़ना से छोड़ी नौकरी, पति का भी नहीं िमला साथ तो पल्लवी ने दे दी जान

किशनगंज : पति व सीडीपीओ की प्रताड़ना से तंग आकर एक पूर्व पर्यवेक्षिका पल्लवी कुमारी ने अपने घर में फांसी का फंदा लगा कर आत्म हत्या कर ली. हत्या के कारणों को जान कर लोग हतप्रभ हैं. अवैध वसूली का किया विरोध, तो पहले तबादला कर दिया, फिर एससीएसटी एक्ट के तहत पल्लवी के ऊपर […]

किशनगंज : पति व सीडीपीओ की प्रताड़ना से तंग आकर एक पूर्व पर्यवेक्षिका पल्लवी कुमारी ने अपने घर में फांसी का फंदा लगा कर आत्म हत्या कर ली. हत्या के कारणों को जान कर लोग हतप्रभ हैं. अवैध वसूली का किया विरोध, तो पहले तबादला कर दिया, फिर एससीएसटी एक्ट के तहत पल्लवी के ऊपर दर्ज करा दी प्राथमिकी. ठाकुरगंज में पदस्थापित पर्यवेक्षिका ने अवैध वसूली का जब विरोध किया और वरीय अधिकारियों को आवेदन दिया, तो उसका तबादला दिघलबैंक कर दिया. कुछ दिनों के बाद दिघलबैंक भी ठाकुरगंज की सीडीपीओ के प्रभार में आ गया और फिर शुरू हो गया प्रताड़ना का दौर.

कामकाज के इतर सीडीपीओ पल्लवी के चरित्र पर भी छींटाकशी करने लगी़ पल्लवी ने सीडीपीओ के विरुद्ध डीएम व एसपी से लेकर प्रमंडलीय आयुक्त, आइसीडीएस निदेशक पटना, राज्य महिला आयोग पटना, समाज कल्याण मंत्री तक आवेदन की प्रतिलिप भेजी थी़ पल्लवी ने न्याय के लिए हर दरवाजा खटखटाया, लेिकन कहीं से न्याय नहीं िमला. एक तो नौकरी में प्रताड़ना दूसरी तरफ पति का प्रताड़ना भी चल रहा था और जब उसके चरित्र पर सवाल उठाया, तो वह बर्दाश्त नहीं कर सकी और फांसी के फंदे पर लटक गयी.

सीडीपीओ पर नहीं हुई कोई कार्रवाई : आवेदन के मद्देनजर सीडीपीओ पर न तो कोई कार्रवाई की गयी न ही कोई जांच की गयी़ उल्टे आवेदन पर हस्ताक्षर करने वाली सभी महिला पर्यवेक्षिकाओं पर तरह-तरह के आरोप लगा कर सबों को अलग-अलग प्रखंडों में तबादला कर दिया गया़ पल्लवी कुमारी का तबादला दिघलबैंक प्रखंड में कर दिया गया़ हालांकि सभी पर्यवेक्षिका तबादले से खुश थीं,
लेकिन कुछ समय बाद ही दिघलबैंक सीडीपीओ का पद रिक्त हो जाने के कारण शशिकला को ही दिघलबैंक सीडीपीओ का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया़ दिघलबैंक का प्रभार मिलने के बाद शशिकला पल्लवी को और अधिक प्रताड़ित करने लगी़ कामकाज के इतर सीडीपीओ शशिकला पल्लवी के चरित्र पर भी छींटाकशी करने लगी़ पल्लवी ने सीडीपीओ शशिकला के विरुद्ध डीएम व एसपी से लेकर आयुक्त, आइसीडीएस निदेशक पटना, राज्य महिला आयोग पटना, समाज कल्याण मंत्री तक आवेदन की प्रतिलिप भेजी थी़
किसी भी स्तर से नहीं हुई कार्रवाई जिला से लेकर राज्य स्तर के पदाधिकारी एवं मंत्रालय के स्तर से सीडीपीओ पर न तो कोई कार्रवाई हुई न ही कोई जांच की गयी़ कार्रवाई न होने से पल्लवी अंदर ही अंदर टूट चुकी थीं.
आत्महत्या या हत्या : कानून के जानकर बतातें हैं कि आत्महत्या जैसे परिस्थिति उत्पन्न कराने वाले अर्थात आत्महत्या के लिए उकसाना भी एक प्रकार से हत्या ही माना जाता है.और इस प्रकरण में भी बहुत-कुछ उसी तरह का प्रतीत होता है. मृत पल्लवी के करीबी और रिश्तेदार बतातें हैं कि टार्चर के कारण पल्लवी लंबे समय से परेशान थी.और अपनी समस्या को लेकर ऑफिस-दर-ऑफिस भटकती रही. न्याय की गुहार लगाती रही.
पति से चल रहा था विवाद
पल्लवी की शादी लगभग 19 वर्ष पहले कटिहार निवासी अजय सिंह से हुई थी़ पिता स्व अभिनंदन सिंह ने बड़े अरमान से पुलिस की नौकरी कर रहे अजय सिंह से उसकी शादी करवायी. शादी के बाद अजय सिंह पत्नी पल्लवी के साथ मारपीट करता था़, लेकिन माता-पिता की इज्जत एवं सामाजिक बंधन के कारण वह पति का जुल्म बर्दाश्त करती रही़ इसी दौरान उसने एक पुत्र और एक पुत्री को जन्म दिया़ समय के साथ-साथ अजय सिंह की प्रताड़ना बढ़ती गयी. अंत में पति को छोड़ कर पिता के घर किशनगंज चली आयी़ पढ़ाई-लिखाई में बेहद मेधावी रही पल्लवी अपने पैरों पर खड़ी होने के लिए प्रयास करने लगी़ भगवान ने भी उसका साथ दिया और उसका चयन 7 वर्ष पूर्व महिला पर्यवेक्षिका के रूप में हो गया़
अब मैं थक चुकी हूं
एक पन्ने में पल्लवी ने लिखा है कि सारी बुक अंकित (बेटे) को खरीद देना और हां मेरे जाने के बाद अंकित एवं प्राची का जन्म दिन मनाना है़ उसने अजय सिंह लिख कर नीचे नंबर वाइज लिखा है कि सिमुलतला आवासीय विद्यालय का फार्म भरा जा रहा है. 25 अप्रैल लास्ट डेट है़ प्राची को भरवा कर परीक्षा दिलवा सकते है़ं एक सुसाइड नोट में पल्लवी ने लिखा है कि अजय सिंह से नफरत थी और मरते समय भी है़ अजय सिंह जितनी बार पीटता था उतनी बार मैं सोचती थी काश…..अब मैं थक चुकी हूं.

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